जब भी हमें अचानक पैसों की बड़ी जरूरत होती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहला विचार 'पर्सनल लोन' (Personal Loan) लेने का आता है। लोग बिना सोचे-समझे विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों में पर्सनल लोन के लिए आवेदन करना शुरू कर देते हैं, लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि उनके पास पहले से ही एक बहुत ही सुरक्षित और किफायती वित्तीय विकल्प मौजूद हो सकता है, जो कि उनकी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) है। अगर आपके पास कोई एक्टिव फिक्स्ड डिपॉजिट है, तो नया पर्सनल लोन लेने से पहले उसे चेक करना आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।
पर्सनल लोन लेने का है प्लान?
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि संकट के समय में पर्सनल लोन लेने के बजाय अपनी एफडी के बदले लोन (Loan against FD) लेना एक बेहद स्मार्ट और समझदारी भरा फैसला है। ऐसा करने से न केवल आप भारी-भरकम ब्याज दरों के जाल में फंसने से बच जाते हैं, बल्कि आपको लोन मिलने की प्रक्रिया भी इतनी आसान और तेज हो जाती है कि आपका कीमती समय और पैसा दोनों सुरक्षित रहते हैं।
कहां कितना है ब्याज में अंतर?
इन दोनों लोन विकल्पों के बीच ब्याज दरों और कुल लागत का अंतर आपकी जेब पर बहुत बड़ा असर डालता है। आमतौर पर, पर्सनल लोन एक अनसिक्योर्ड लोन (Unsecured Loan) की श्रेणी में आता है, जिसका मतलब है कि बैंक बिना किसी गारंटी के आपको पैसा देता है; और इसी जोखिम के कारण बैंक इस पर 10.5% से लेकर 24% या उससे भी अधिक की सालाना ब्याज दर वसूलते हैं। इसके विपरीत, एफडी के बदले मिलने वाला लोन एक सिक्योर्ड लोन (Secured Loan) होता है, क्योंकि इसमें आपकी फिक्स्ड डिपॉजिट ही बैंक के पास गारंटी के रूप में होती है। इस वजह से बैंक इस लोन पर बेहद कम ब्याज लेते हैं, जो आमतौर पर आपकी एफडी पर मिलने वाले मौजूदा ब्याज से केवल 1% से 2% अधिक होता है।
उदाहरण के लिए, यदि आपकी एफडी पर आपको 7% का ब्याज मिल रहा है, तो आपको उसके बदले महज 8% या 9% की दर पर लोन मिल जाएगा, जो कि किसी भी पर्सनल लोन की तुलना में बहुत ज्यादा सस्ता है। इस तरह, सिर्फ एक सही फैसले से आप हर महीने दी जाने वाली ईएमआई (EMI) में एक बड़ी रकम की बचत कर सकते हैं और अपने ऊपर से कर्ज का बोझ कम कर सकते हैं।
FD पर लोन लेने के फायदे
ब्याज दरों के अलावा, एफडी पर लोन लेने के कई अन्य व्यावहारिक और छिपे हुए लाभ भी हैं जो आम तौर पर लोगों को पता नहीं होते। पर्सनल लोन लेते समय बैंकों द्वारा ली जाने वाली भारी प्रोसेसिंग फीस (Processing Fee), प्री-पेमेंट चार्जेस (समय से पहले लोन बंद करने का शुल्क) और कड़े नियमों का सामना करना पड़ता है, जबकि एफडी के बदले लोन में प्रोसेसिंग फीस या तो शून्य होती है या बेहद मामूली होती है। इसके साथ ही, इस लोन को लेने के लिए आपको किसी लंबे कागजी काम, सैलरी स्लिप या बेहतरीन सिबिल स्कोर (CIBIL Score) की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि बैंक आपकी जमा पूंजी के आधार पर चंद मिनटों में लोन अप्रूव कर देता है। सबसे बड़ी बात यह है कि लोन लेने के बावजूद आपकी एफडी पर मिलने वाला ब्याज लगातार जारी रहता है, यानी आपका निवेश बढ़ता रहता है और आपको अपनी जरूरत के लिए लिक्विड मनी भी मिल जाती है।
