कमाई करना और पैसे बचाना हर परिवार के लिए जरूरी है, लेकिन अचानक आने वाली मुसीबतों से निपटने के लिए आर्थिक तैयारी करना भी उतना ही अहम है। नौकरी जाने, परिवार में किसी के बीमार होने या अचानक बड़ा खर्च आने पर बचत की जरूरत पड़ती है। इसके बावजूद देश के कई परिवारों के पास ऐसी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं। फिनोवेट फाइनेंशियल सर्विसेज की एक रिपोर्ट में सामने आया है कि 46 फीसदी लोगों के पास तीन महीने का खर्च चलाने के बराबर इमरजेंसी फंड नहीं है। वहीं, 60 फीसदी लोगों के पूरे परिवार का हेल्थ इंश्योरेंस कवर 25 लाख रुपये से कम है। रिपोर्ट में बचत, कर्ज, निवेश, टैक्स प्लानिंग और परिवार की आर्थिक सुरक्षा जैसे पहलुओं का आकलन किया गया है।
46% भारतीयों के पास इमरजेंसी फंड नहीं, 60% के पास हेल्थ कवर नहीं
46% लोगों के पास इमरजेंसी फंड नहीं
इमरजेंसी फंड वह रकम होती है, जिसे अचानक जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, नौकरी छूटने, बीमारी या किसी जरूरी पारिवारिक खर्च के समय यह पैसा काम आता है। रिपोर्ट के मुताबिक, 46 फीसदी लोगों के पास तीन महीने के खर्च के बराबर बचत नहीं है या उनके पास कोई इमरजेंसी फंड नहीं है। ऐसे में अगर अचानक कमाई बंद हो जाए या कोई बड़ा खर्च सामने आ जाए, तो परिवार का बजट बिगड़ सकता है। इमरजेंसी फंड कितना होना चाहिए, यह हर परिवार की आमदनी, मासिक खर्च, EMI और जिम्मेदारियों पर निर्भर करता है।
60% लोगों का हेल्थ कवर 25 लाख रुपये से कम
रिपोर्ट में हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर भी चिंता सामने आई है। सर्वे के अनुसार, 60 फीसदी लोगों के पूरे परिवार का हेल्थ इंश्योरेंस कवर 25 लाख रुपये से कम है। आज अस्पताल में इलाज का खर्च काफी बढ़ रहा है। ऐसे में सिर्फ हेल्थ इंश्योरेंस होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि पॉलिसी बड़े इलाज का खर्च उठाने के लिए पर्याप्त है या नहीं।
कितने लोगों के पास हेल्थ इंश्योरेंस?
सर्वे के मुताबिक, करीब 43 फीसदी लोगों के पास कंपनी से मिलने वाला और खुद खरीदा गया, दोनों तरह का हेल्थ इंश्योरेंस है। वहीं, 14 फीसदी लोग केवल कंपनी की ओर से मिलने वाले हेल्थ कवर पर निर्भर हैं। इसके अलावा, 14 फीसदी लोगों ने बताया कि उनके पास कोई हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है। कंपनी का बीमा नौकरी से जुड़ा होता है और नौकरी बदलने या रिटायरमेंट के बाद यह कवर जारी रहे, इसकी गारंटी नहीं होती। इसलिए अपनी जरूरत के हिसाब से अलग हेल्थ इंश्योरेंस लेने पर भी विचार करना चाहिए।
मेडिकल महंगाई बढ़ा सकती है परेशानी
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में मेडिकल महंगाई करीब 11 से 14 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि सामान्य महंगाई 6 से 7 फीसदी के आसपास बताई गई है। इसका मतलब है कि इलाज का खर्च सामान्य खर्चों के मुकाबले तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में आज जो हेल्थ कवर पर्याप्त लग रहा है, वह भविष्य में कम पड़ सकता है।
57% लोगों पर EMI का बोझ
रिपोर्ट में कर्ज और EMI की स्थिति भी सामने आई है। सर्वे के मुताबिक, 57 फीसदी लोगों पर किसी न किसी तरह की EMI चल रही है। इनमें 21 फीसदी लोग अपनी आमदनी का 20 से 40 फीसदी हिस्सा EMI चुकाने में खर्च करते हैं। वहीं, 9 फीसदी लोगों की आय का 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सा EMI में चला जाता है। ऐसे में बचत करना और अचानक आने वाले खर्चों के लिए पैसा अलग रखना मुश्किल हो सकता है।
