Online Gaming Bill 2025: केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित ऑनलाइन गेमिंग के प्रोमोशम और रेगुलेशन बिल 2025 (Promotion and Regulation of Online Gaming Bill 2025) को लेकर भारत के ऑनलाइन गेमिंग संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है। यह बिल असली पैसे (रियल मनी) वाले गेम्स पर संभावित पूर्ण प्रतिबंध लगाने की दिशा में है। ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री के प्रमुख संस्था ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन (AIGF), ई-गेमिंग फेडरेशन (EGF) और फेडरेशन ऑफ इंडिया फैंटेसी स्पोर्ट्स (FIFS) ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस मुद्दे में हस्तक्षेप करने की अपील की है।
ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025: असली पैसे वाले गेम्स पर संभावित प्रतिबंध को लेकर उद्योग में चिंता (तस्वीर-istock)
Online Gaming Bill 2025: बिल का उद्देश्य
समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा पेश किए जाने वाले इस बिल का उद्देश्य ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री को रेगुलेट करने के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा तैयार करना है, साथ ही राज्य की सीमाओं के पार या विदेशी क्षेत्राधिकारों से संचालित होने वाले पैसे वाले गेम्स पर प्रतिबंध लगाना है।
इसके प्रमुख प्रावधानों में शामिल हैं:-
- अंतर-राज्यीय और विदेशी क्षेत्राधिकार से संचालित रियल मनी ऑनलाइन गेम्स को प्रतिबंधित करना।
- ऐसे गेम्स का प्रचार, विज्ञापन, संचालन, भागीदारी, और सुविधा प्रदान करना अपराध की श्रेणी में लाना।
- युवाओं और संवेदनशील वर्गों को सामाजिक, आर्थिक, मानसिक और गोपनीयता संबंधी प्रभावों से बचाना।
- डिजिटल प्रौद्योगिकियों के जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करना और सार्वजनिक व्यवस्था व स्वास्थ्य की रक्षा करना।
तीनों प्रमुख गेमिंग संगठन अखिल भारतीय गेमिंग महासंघ (एआईजीएफ), ई-गेमिंग महासंघ (ईजीएफ) और फेडरेशन ऑफ इंडिया फैंटेसी स्पोर्ट्स (एफआईएफएस) ने कहा कि वे सामूहिक रूप से भारत में करीब पूरे कौशल-आधारित ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसे उन्होंने प्रधानमंत्री के 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण का एक प्रमुख स्तंभ बताया।
उद्योग निकायों की आपत्ति: पूर्ण प्रतिबंध उद्योग के लिए विनाशकारी
तीनों प्रमुख गेमिंग संगठनों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि यह बिल अगर सभी रियल मनी गेम्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है, तो यह एक वैध, नौकरी देने वाले और तेजी से बढ़ते उद्योग के लिए मृत्युदंड के समान होगा। वे मानते हैं कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को $1 ट्रिलियन तक पहुंचाने के प्रधानमंत्री के विजन में यह क्षेत्र एक प्रमुख स्तंभ है।
तेजी से बढ़ता हुआ उद्योग खतरे में
संघों ने बताया कि भारत का ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र ₹2 लाख करोड़ से अधिक का मूल्य रखता है। यह हर साल करीब ₹31,000 करोड़ का राजस्व उत्पन्न करता है। अब तक ₹25,000 करोड़ से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया है। 2020 में 36 करोड़ खिलाड़ियों की संख्या अब 50 करोड़ (2024) से अधिक हो चुकी है। 2 लाख से ज्यादा नौकरियों का प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन करता है। 20% की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ रहा है, और 2028 तक इसके दोगुना होने की उम्मीद है।
सरकार से अपील: बनाएं प्रगतिशील नीतियां, न कि प्रतिबंध
उद्योग निकायों ने सरकार से आग्रह किया कि हम आपसे इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की विनती करते हैं और अनुरोध करते हैं कि हमें अपनी बात रखने और जिम्मेदार गेमिंग के लिए समाधान प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पास वैश्विक गेमिंग नेतृत्व स्थापित करने का अवसर है और यह तभी संभव है जब सरकार प्रगतिशील नीतियों को अपनाए, न कि प्रतिबंधात्मक रुख।
यह बिल जहां एक ओर डिजिटल सुरक्षा, सामाजिक प्रभाव और सार्वजनिक स्वास्थ्य के उद्देश्य से लाया जा रहा है, वहीं उद्योग इसे भारत के डिजिटल विकास में बाधा मान रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार उद्योग के सुझावों को शामिल करती है या नहीं, और क्या यह बिल गेमिंग क्षेत्र में संतुलन और जिम्मेदारी ला पाएगा।
