सीजफायर की उम्मीदें टूटी, कच्चे तेल में लगी आग; 114 डॉलर के करीब पहुंचे दाम

कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग थमने का नाम ही नहीं ले रही है। ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर की उम्मीद टूटने से एक बार फिर ब्रेंट क्रूड की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है।

कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग थमने का नाम ही नहीं ले रही है। ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर की उम्मीद टूटने से एक बार फिर ब्रेंट क्रूड की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। इस वैश्विक तनाव ने न केवल सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, बल्कि वॉल स्ट्रीट से लेकर भारतीय बाजारों तक महंगाई का डर (Inflation Scare) पैदा कर दिया है। तेल की कीमतों में आए इस अचानक उछाल ने दुनिया के लगभग 120 देशों को पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है। यह संकट अब केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। निवेशकों को डर है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो सकती है, जिससे कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं।

Crude Oil

अमेरिका-ईरान के बीच फिर बढ़ता तनाव

कच्चे तेल की कीमतों में आए इस उछाल का मुख्य कारण मध्य-पूर्व में बढ़ती सैन्य गतिविधियां हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हुई ताजा सैन्य झड़पों ने शांति की उन कोशिशों को बड़ा झटका दिया है, जिनकी उम्मीद दुनिया भर के बाजार कर रहे थे। जैसे ही सीजफायर की बातचीत विफल होने की खबर आई, वॉल स्ट्रीट (अमेरिकी शेयर बाजार) से लेकर एशियाई बाजारों तक खलबली मच गई। कच्चे तेल का 114 डॉलर के करीब पहुंचना शेयर बाजारों के लिए खतरे की घंटी है, क्योंकि इससे कंपनियों की लागत बढ़ती है और अंततः शेयर बाजार में गिरावट का दौर शुरू हो जाता है।

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