Share Market F&O Trading Loss of Retail Traders: शेयर बाजार में Futures & Options यानी F&O ट्रेडिंग को लेकर SEBI की सख्ती का असर यह हुआ है कि सट्टेबाजी की तरह इस्तेमाल किए जाने वाली इस ट्रेडिंग में इस साल 20% ट्रेडर कम हुए हैं। SEBI के आंकड़ों के मुताबिक FY26 में इक्विटी डेरिवेटिव्स में सक्रिय व्यक्तिगत ट्रेडर्स की संख्या करीब 20 फीसदी घटकर 78.6 लाख रह गई है।
शेयर बाजार में बढ़ा ट्रेडर्स का नुकसान
10 साल में पहली बार घटे ट्रेडर
पिछले 10 साल में यह पहली बार है, जब F&O मार्केट में रिटेल ट्रेडर्स की संख्या घटी है। SEBI की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक FY16 के बाद पहली सालाना गिरावट है। लेकिन, हैरानी की बात यह है कि ट्रेडर्स की संख्या घटने के बावजूद नुकसान का खेल खत्म नहीं हुआ। FY26 में रिटेल ट्रेडर्स को कुल 91,685 करोड़ रुपये का नेट नुकसान हुआ।
प्रति ट्रेडर औसत नुकसान बढ़ा
SEBI की स्टडी के मुताबिक FY25 में व्यक्तिगत ट्रेडर्स का कुल नुकसान संशोधित आंकड़े के आधार पर करीब 1.12 लाख करोड़ रुपये था। यानी FY26 में कुल नुकसान करीब 18 फीसदी घटा। लेकिन, इसे देखकर यह मान लेना गलत होगा कि रिटेल ट्रेडर के लिए F&O ट्रेडिंग बेहतर हो गई है। क्योंकि, औसत ट्रेडर का नुकसान उल्टा बढ़ गया। FY26 में प्रति ट्रेडर औसत नेट नुकसान करीब 1.17 लाख रुपये रहा, जबकि FY25 में यह करीब 1.14 लाख रुपये था। यानी बाजार से कम लोग जुड़े, लेकिन जो लोग टिके रहे, उनमें नुकसान ज्यादा हुआ है। करीब 87.7 फीसदी रिटेल ट्रेडर्स को हुआ। हालांकि, यह अनुपात FY25 के 90.9 फीसदी से कुछ कम है, लेकिन इसका मतलब अब भी यही है कि F&O में करीब 10 में से 9 व्यक्तिगत ट्रेडर्स पैसा गंवा रहे हैं।
46 लाख ट्रेडर्स ने छोड़ा बाजार
SEBI के आंकड़ों में एक और बड़ा बदलाव दिखाई देता है। FY25 में F&O में सक्रिय रहे करीब 46 लाख ट्रेडर्स ने FY26 में ट्रेडिंग नहीं की। इसके अलावा नए ट्रेडर्स की एंट्री भी तेजी से घटी। FY25 में करीब 34.3 लाख नए व्यक्तिगत ट्रेडर्स F&O बाजार में आए थे, जबकि FY26 में यह संख्या घटकर करीब 20.8 लाख रह गई। यानी नए ट्रेडर्स की एंट्री में लगभग 40 फीसदी की गिरावट आई। यह बदलाव बताता है कि डेरिवेटिव्स बाजार में वह तेज रिटेल उछाल अब कमजोर पड़ रहा है, जो पिछले कुछ वर्षों में देखने को मिला था।
SEBI के नियमों का दिखा असर
इस बदलाव के पीछे नवंबर 2024 से लागू किए गए SEBI के कई उपाय अहम माने जा रहे हैं। इनमें हर एक्सचेंज पर साप्ताहिक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट को एक इंडेक्स तक सीमित करना, कॉन्ट्रैक्ट का न्यूनतम आकार बढ़ाना, ऑप्शन प्रीमियम की अग्रिम वसूली, एक्सपायरी वाले दिन कैलेंडर स्प्रेड का फायदा हटाना और शॉर्ट ऑप्शन पोजीशन पर अतिरिक्त मार्जिन जैसे कदम शामिल थे।
कहां सबसे ज्यादा नुकसान?
FY26 में व्यक्तिगत ट्रेडर्स के कुल नुकसान का करीब 92 फीसदी हिस्सा Options ट्रेडिंग से आया। यानी असली समस्या Futures से ज्यादा Options में बनी हुई है। SEBI के आंकड़ों के मुताबिक करीब 23 फीसदी ट्रेडर्स ने कुल नुकसान का लगभग 90 फीसदी हिस्सा झेला। इसका मतलब यह है कि नुकसान सभी ट्रेडर्स में समान रूप से नहीं बंटा है, बल्कि अपेक्षाकृत छोटे समूह पर बहुत बड़ा नुकसान केंद्रित है
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