अब QR कोड के साथ बिकेगी असली कोल्हापुरी चप्पल, नकली माल की बिक्री पर लगेगी लगाम

अब हर जोड़ी कोल्हापुरी चप्पल में एक QR कोड लगा होगा, जिसे स्कैन करने पर ग्राहक यह जान सकेंगे कि चप्पल किस कारीगर ने बनाई है, किस जिले में इसका निर्माण हुआ है, इसमें किस तकनीक और किस कच्चे माल का इस्तेमाल किया गया है, और इसके GI टैग की वैधता क्या है।

कोल्हापुरी चप्पल, जो भारत की सबसे मशहूर और पारंपरिक चप्पलों में से एक है, एक बार फिर चर्चा में है। दरअसल, कोल्हापुरी चप्पल अब QR कोड के साथ बाजार में मिलेगी। यह कदम उठाया गया है ताकि नकली कोल्हापुरी चप्पलों की बिक्री पर रोक लग सके और असली कारीगरों को उनकी पहचान और मेहनत का पूरा सम्मान मिल सके।

Kolhapuri Chappal

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कोल्हापुरी चप्पलें अपनी सुंदर डिज़ाइन, हाथ की कारीगरी और सांस्कृतिक विरासत के लिए जानी जाती हैं। इन्हें महाराष्ट्र के कोल्हापुर, सांगली और सोलापुर जिलों में मुख्य रूप से तैयार किया जाता है और इन्हें 2019 में GI टैग भी मिल चुका है। इसका मतलब है कि यह चप्पलें खास इसी क्षेत्र की पहचान हैं और कहीं और बनाई गई नकली चप्पलें असली नहीं मानी जाएंगी।

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