विकसित भारत के लिए सरकारी बैंकों का बदलना क्यों जरूरी? वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा- पहचानें अपनी ताकत

Public Sector Banks: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को कार्यशैली और प्राथमिकताओं में बदलाव की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सरकारी बैंकों ने सुधार और संकट से उबरने की मजबूत क्षमता दिखाई है।

Public Sector Banks : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) को अपनी कार्यशैली और प्राथमिकताओं में बदलाव लाने की सलाह दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकारी बैंकों ने पिछले कुछ वर्षों में खुद को बेहतर बनाने और संकटों से उबरने की जबरदस्त क्षमता साबित की है। अब समय आ गया है कि बैंक अपनी इस मौजूदा मजबूती का इस्तेमाल बड़ी महत्वाकांक्षाओं, नई प्राथमिकताओं और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए करें। भारत को एक 'विकसित राष्ट्र' बनाने के लक्ष्य में बैंकों की भूमिका सबसे अहम होने वाली है।

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'विकसित भारत' का नया इंजन बनेंगे सरकारी बैंक, वित्त मंत्री सीतारमण का बड़ा बयान

बैंकों की असली ताकत और नया लक्ष्य

वित्त मंत्री के अनुसार, सरकारी बैंकों के पास ग्राहकों का एक बहुत बड़ा भरोसा, देश के कोने-कोने तक फैला विशाल शाखा नेटवर्क, वर्षों का संस्थागत अनुभव और लगातार मजबूत होती डिजिटल तकनीक मौजूद है। बैंकों को इन अपनी सभी ताकतों को अब व्यावसायिक बढ़त में बदलना होगा। बैंकों को सिर्फ पारंपरिक बैंकिंग तक सीमित रहने के बजाय उन नए क्षेत्रों और ग्राहक वर्गों में अपनी मजबूत पकड़ बनानी होगी, जहां वे अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं।

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