आवश्यकता बनी आविष्कार की जननी! LPG का देसी विकल्प हुआ तैयार, जल्द शुरू होगी सप्लाई

वैज्ञानिकों का मानना है कि बड़े पैमाने पर DME के उपयोग से भारत न केवल एलपीजी आयात पर निर्भरता घटा सकेगा, बल्कि एक स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ा पाएगा।

पुरानी कहावत है— आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। यानी इंसान को जब-जब जिस की जरूरत पड़ी, उसने उसका आविष्कार किया। पाषाण काल में आग से लेकर पहिये का आविष्कार भी ऐसे ही हुआ था। एक बार फिर भारत ने ऐसा ही किया है। ईरान द्वारा दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा शिपिंग रूट स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद करने के बाद भारत ने LPG गैस का नया विकल्प ढूंढ लिया है। इससे आने वाले दिनों में भारत की एलपीजी आयात पर निर्भरता कम होगी और सरकार के लाखों करोड़ रुपये बचेंगे। आइए जानते हैं कि भारत ने ऐसा क्या किया है?

LPG  Crisis

स्वदेशी तकनीक विकसित की गई

CSIR-नेशनल केमिकल लेबोरेटरी (CSIR-NCL) के वैज्ञानिकों ने Dimethyl Ether (DME) बनाने के लिए एक स्वदेशी तकनीक विकसित की है। यह एक साफ जलने वाला ईंधन है जिसे Liquefied Petroleum Gas (LPG) के साथ मिलाया जा सकता है। संस्थान द्वारा DME एक साफ़ जलने वाला सिंथेटिक ईंधन है जो पारंपरिक ईंधनों की तुलना में कालिक, नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), सल्फर ऑक्साइड (SOx) और कणों (particulate matter) का उत्सर्जन काफी कम करता है, जबकि इसकी तापीय दक्षता (thermal efficiency) पारंपरिक ईंधनों के बराबर ही होती है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने पहले ही मानक IS 18698:2024 जारी कर दिया है, जो घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपयोगों के लिए LPG के साथ 20 प्रतिशत तक DME मिलाने की अनुमति देता है।

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