अक्सर लोग मानते हैं कि इनकम टैक्स में मिलने वाली छूट का फायदा सिर्फ भारत में रहने वाले नागरिकों को मिलता है, लेकिन ऐसा नहीं है। अगर आप NRI यानी नॉन रेजिडेंट इंडियन हैं, तब भी कुछ शर्तें पूरी करने पर म्यूचुअल फंड बेचकर भारत में घर खरीदने पर टैक्स छूट का लाभ ले सकते हैं। इसके लिए इनकम टैक्स एक्ट में विशेष प्रावधान है। नए इनकम टैक्स एक्ट, 2025 में यह प्रावधान सेक्शन 86 के तहत है, जो पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 54F के समान है। यह सुविधा भारतीय निवासी और NRI, दोनों के लिए उपलब्ध है।
म्यूचुअल फंड बेचने पर बचा सकते हैं लाखों का टैक्स
क्या है सेक्शन 54F का नियम?
इस नियम के तहत अगर कोई व्यक्ति म्यूचुअल फंड जैसी लंबी अवधि की पूंजीगत संपत्ति बेचता है और उससे मिली रकम भारत में घर खरीदने या बनवाने में लगाता है, तो उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में छूट मिल सकती है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पूरी छूट पाने के लिए सिर्फ मुनाफे की रकम नहीं, बल्कि म्यूचुअल फंड बेचने से मिली पूरी नेट रकम को नए घर में लगाना होता है। अगर आप बिक्री की रकम का कुछ हिस्सा ही घर खरीदने में लगाते हैं, तो टैक्स छूट भी उसी अनुपात में मिलेगी।
घर खरीदने के लिए कितनी मिलती है मोहलत?
टैक्स छूट पाने के लिए समयसीमा का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। म्यूचुअल फंड बेचने से एक साल पहले तक खरीदा गया घर भी इस नियम के दायरे में आ सकता है। इसके अलावा, बिक्री के दो साल के भीतर घर खरीदना होगा। अगर आप घर बनवाना चाहते हैं, तो इसके लिए तीन साल का समय मिलता है। अगर इन समयसीमाओं के भीतर पूरी रकम इस्तेमाल नहीं हो पाती, तो इनकम टैक्स रिटर्न भरने की तय तारीख से पहले बची रकम को कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम में जमा करना होगा।
टैक्स छूट के लिए इन शर्तों का रखें ध्यान
इस छूट का लाभ लेने के लिए म्यूचुअल फंड यूनिट का लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट होना जरूरी है। साथ ही, म्यूचुअल फंड बेचने की तारीख पर आपके पास नए घर के अलावा एक से ज्यादा रिहायशी मकान नहीं होना चाहिए। नए खरीदे या बनवाए गए घर को तीन साल तक बेचना भी नहीं चाहिए, वरना पहले मिली छूट वापस टैक्स के दायरे में आ सकती है। इसके अलावा, एक साल के भीतर दूसरा घर खरीदने या तीन साल के भीतर दूसरा घर बनवाने पर भी छूट प्रभावित हो सकती है। इस गणना में अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक की रकम ही शामिल की जा सकती है।
इसलिए विदेश में रहने वाले भारतीयों को म्यूचुअल फंड बेचने और घर खरीदने से पहले अपनी टैक्स स्थिति, निवेश की अवधि और सभी दस्तावेज जांच लेने चाहिए। अगर आप विदेश में भी टैक्स रेजिडेंट हैं, तो वहां के टैक्स नियमों का असर अलग से समझना जरूरी है। किसी टैक्स एक्सपर्ट से सलाह लेकर ही निवेश बेचने और प्रॉपर्टी खरीदने का फैसला करें।
