FD से ज्यादा ब्याज, Share Market से ज्यादा सेफ, समझें कॉरपोरेट बॉन्ड का गेम और मुनाफे का गणित

निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ऐसे एसेट क्लास तलाशना है, जो बैंक जमाओं से बेहतर ब्याज दें। लेकिन, साथ ही शेयर मार्केट की तुलना में सेफ हों। यहीं पर एंट्री होती है कॉरपोरेट बॉन्ड्स की। यहां समझें पूरा गेम।

Corporate Bonds Vs FD : फिलहाल, Share Market के हालात को देखते हुए बड़ी तादाद में निवेशक बैंक जमाओं की तरफ लौट रहे हैं। RBI के आंकड़ों के मुताबिक भारत मे बैंक जमा हर साल 10 से 12 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहे हैं। खासतौर पर FD में निवेशकों रुचि दिखा रहे हैं। SIP और Share Market के खराब प्रदर्शन की वजह से अब तमाम निवेशक ऐसे ठिकाने तलाश रहे हैं, जहां उन्हें FD या उससे बेहतर रिटर्न मिले और शेयर मार्केट जैसा जोखिम नहीं उठाना पड़े। यहां कॉरपोरेट बॉन्ड्स की एंट्री होती है।

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कॉरपोरेट बॉन्ड देते हैं ज्यादा ब्याज

क्या होते हैं कॉरपोरेट बॉन्ड्स?

कॉरपोरेट बॉन्ड असल में कंपनियों की तरफ से उधारी लेने का एक जरिया है। असाना शब्दों में यह समझ लें कि आप किसी कॉरपोरेट कंपनी या सरकार को तय समय के लिए पैसा उधार देंगे। इसके बदले आपको ब्याज मिलेगा और तय समय पर पूरी रकम वापस मिल जाएगी। यहां, एक सुविधा यह भी होती है कि आप शेयरों की तरह इन बॉन्ड्स को ट्रेड भी कर सकते हैं।

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