MCX पर आज 20 फरवरी को कमोडिटी बाजार में कारोबार सेक्टर-आधारित मूवमेंट के साथ शुरू हुआ। बुलियन और क्रूड ऑयल में जहां सीमित खरीदारी देखने को मिली है। वहीं, नेचुरल गैस भारी दबाव में है। जबकि, बेस मेटल्स में शुरुआती कारोबार के दौरान हल्की तेजी देखने को मिली, लेकिन जल्द ही बिकवाली हावी हो गई और फिलहाल, बेस मेटल्स रेंज बाउंड कमजोरी के साथ कारोबार कर रहे हैं।
बेस मेटल्स आज का भाव
बुलियन में रिकवरी जारी
सिल्वर फ्यूचर के मार्च कॉन्ट्रैक्ट करीब आधा फीसदी की बढ़त के साथ 2.42 लाख रुपये के ऊपर कारोबार कर रहे हैं। वहीं, गोल्ड के अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट में भी हल्की मजबूती बनी हुई है और भाव 1.55 लाख रुपये के आसपास बना हुआ है। इसी तरह गोल्ड गिनी, गोल्ड पेटल और गोल्ड टेन में भी सीमित तेजी दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि हालिया गिरावट के बाद निचले स्तरों पर खरीदारी लौट रही है, हालांकि ट्रेंड अभी निर्णायक नहीं है, लिहाजा ट्रेडर्स सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
एनर्जी में मिला-जुला रुख
एनर्जी सेक्टर में क्रूड ऑयल करीब 0.3% चढ़कर 6,070 रुपये के आसपास कारोबार करता दिख रहा है। इंटरनेशनल मार्केट के संकेत और सप्लाई से जुड़े फैक्टर क्रूड ऑयल को सहारा दे रहे हैं। इसके विपरीत नेचुरल गैस लगभग 0.9% गिरकर 269 रुपये के करीब फिसल गई। गैस में लगातार वोलैटिलिटी बनी हुई है और कीमतें फिलहाल दबाव में हैं। यह दर्शाता है कि एनर्जी सेगमेंट के भीतर भी चाल एकसमान नहीं है।
बेस मेटल्स में नरमी जारी
कॉपर और एल्यूमिनियम में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। जबकि जिंक टॉप लूजर है और लेड लगभग सपाट स्तर पर कारोबार कर रहा है। निकेल में मामूली बढ़त देखने को मिली। इंडस्ट्रियल डिमांड को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक संकेतों की प्रतीक्षा के चलते बेस मेटल्स फिलहाल सीमित दायरे में कारोबार कर रहे हैं। इस सेगमेंट में स्पष्ट दिशा का अभाव नजर आ रहा है।
इंडेक्स स्तर पर स्थिरता
MCX iCOMDEX कंपोजिट और बुलियन इंडेक्स में हल्की मजबूती रही, जबकि नेचुरल गैस इंडेक्स दबाव में रहा। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में व्यापक गिरावट नहीं है, बल्कि अलग-अलग कमोडिटीज में अलग चाल देखने को मिल रही है।
आगे की दिशा पर नजर
कुल मिलाकर कमोडिटी बाजार फिलहाल संतुलन की स्थिति में है। बुलियन और क्रूड में सीमित सपोर्ट दिख रहा है, लेकिन नेचुरल गैस और कुछ बेस मेटल्स दबाव में हैं। आगे की दिशा डॉलर इंडेक्स, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अंतरराष्ट्रीय मांग के संकेत तय करेंगे। फिलहाल ट्रेडर्स सेक्टर-आधारित रणनीति के साथ सतर्कता बरतते नजर आ रहे हैं।
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