शेयर बाजार में गिरावट या बड़ा क्रैश अक्सर निवेशकों के लिए चिंता की वजह बन जाता है। ऐसे समय में लोगों के निवेश की वैल्यू कम हो जाती है और कई बार रिटर्न भी निगेटिव दिखने लगते हैं। लेकिन अगर आप SIP (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए निवेश कर रहे हैं, तो बाजार में गिरावट हमेशा बुरी खबर नहीं होती। एक्सपर्ट्स का मानना है कि गिरता बाजार SIP (Systematic Investment Plan) निवेशकों के लिए एक बड़ा मौका भी बन सकता है।
क्या मार्केट क्रैश होने पर SIP इन्वेस्टर्स को घबराना चाहिए?
SIP निवेशकों के लिए क्यों फायदेमंद हो सकता है बाजार का क्रैश?
SIP की खासियत यह है कि इसमें हर महीने एक तय रकम निवेश की जाती है। जब बाजार ऊपर होता है, तो उसी रकम में कम यूनिट्स मिलती हैं। लेकिन जब बाजार गिरता है, तो उसी रकम में ज्यादा यूनिट्स खरीदी जा सकती हैं। यही प्रक्रिया ‘रुपी कॉस्ट एवरेजिंग’ कहलाती है। उदाहरण के लिए, अगर किसी म्यूचुअल फंड का NAV 100 रुपये है और आप 10,000 रुपये की SIP करते हैं, तो आपको 100 यूनिट्स मिलेंगी। लेकिन अगर बाजार गिरने के कारण NAV 80 रुपये हो जाए, तो उसी 10,000 रुपये में आपको 125 यूनिट्स मिलेंगी। यानी गिरावट के समय आप ज्यादा यूनिट्स जमा कर पाते हैं।
XIRR क्या है और क्यों है जरूरी?
SIP में हर महीने अलग-अलग कीमत पर निवेश होता है, इसलिए इसमें सामान्य रिटर्न या CAGR सही तस्वीर नहीं दिखाते। ऐसे में XIRR सबसे सही तरीका माना जाता है, क्योंकि यह निवेश की तारीख और रकम दोनों को ध्यान में रखकर असली रिटर्न बताता है। इसी वजह से SIP निवेशक अपनी कमाई मापने के लिए XIRR का इस्तेमाल करते हैं।
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए दो लोग हर महीने 10,000 रुपये की SIP करते हैं और 10 साल तक निवेश जारी रखते हैं। दोनों का कुल निवेश 12 लाख रुपये होता है। पहले निवेशक का बाजार लगातार बढ़ता रहता है और उसे कुल 8,626 यूनिट्स मिलती हैं। अगर 10वें साल के अंत में NAV 200 रुपये पहुंचता है, तो उसका कुल फंड करीब 17.25 लाख रुपये हो जाता है। दूसरी तरफ, दूसरे निवेशक के निवेश के पांचवें साल बाजार में बड़ा क्रैश आता है। इस दौरान उसे सस्ते भाव में ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं और कुल 9,886 यूनिट्स जमा हो जाती हैं। जब 10वें साल NAV फिर 200 रुपये पहुंचता है, तो उसका फंड करीब 19.77 लाख रुपये हो जाता है। यानी दोनों ने समान रकम निवेश की, लेकिन बाजार गिरने के दौरान SIP जारी रखने वाले निवेशक को लगभग 2.5 लाख रुपये ज्यादा फायदा मिला।
सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं निवेशक?
अक्सर देखा जाता है कि बाजार गिरते ही लोग घबराकर अपनी SIP बंद कर देते हैं। यही सबसे बड़ी गलती होती है। ऐसा करने से वे सस्ते भाव पर ज्यादा यूनिट्स खरीदने का मौका खो देते हैं। बाद में जब बाजार संभल जाता है और कीमतें फिर बढ़ जाती हैं, तब लोग दोबारा निवेश शुरू करते हैं। इससे उनका औसत खरीद मूल्य बढ़ जाता है और लॉन्ग टर्म रिटर्न पर असर पड़ता है।
लंबी अवधि के निवेशकों को मिलता है सबसे ज्यादा फायदा
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जिन निवेशकों का लक्ष्य लंबी अवधि का होता है, जैसे रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई या घर खरीदना, उनके लिए बाजार की गिरावट फायदेमंद साबित हो सकती है। शर्त सिर्फ इतनी है कि वे धैर्य रखें और अपनी SIP जारी रखें। बाजार में गिरावट अल्पकाल में नुकसान जरूर दिखाती है, लेकिन SIP निवेशकों के लिए यह भविष्य की कमाई का मजबूत आधार बन सकती है। इसलिए घबराने की बजाय अनुशासन बनाए रखना और निवेश जारी रखना ही समझदारी है।
