बिल्डर-बायर्स को बड़ी राहत: NCLAT ने कहा- जिस प्रोजेक्ट में दिक्कत, दिवाला प्रक्रिया सिर्फ उसी के खिलाफ होगी

NCLAT ने अपने हालिया फैसले में कहा है कि किसी एक प्रोजेक्ट पर दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने का असर उस बिल्डर के दूसरे प्रोजेक्ट पर नहीं होगा। इससे होम बायर्स को बड़ी राहत मिलेगी।

NCLAT ने बिल्डर और बायर्स के हक में बड़ा फैसला दिया है। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने कहा है कि रियल एस्टेट कंपनियों के खिलाफ शुरू की गई कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) केवल उसी प्रोजेक्ट तक सीमित रहनी चाहिए जिसमें चूक (डिफॉल्ट) हुई है। अपीलीय न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया है कि इसे कॉरपोरेट देनदार की अन्य प्रोजेक्ट तक नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। इस फैसले से एक प्रोजेक्ट की गलती की सजा पूरी कंपनी को नहीं मिलेगी और दूसरे प्रोजेक्ट का काम बिना किसी परेशानी से पूरा हो पाएगा। इससे होम बायर्स और बिल्डर दोनों को फायदा मिलेगा।

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रियल एस्टेट

घर खरीदारों के लिए राहत की खबर

न्यायाधिकरण ने कहा कि किसी रियल एस्टेट कंपनी की सभी प्रोजेक्ट को दिवाला कार्रवाई के तहत लाना न तो चूक वाली प्रोजेक्ट के घर-खरीदारों और न ही अन्य प्रोजेक्ट के हितधारकों के हित में है। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि अगर किसी विशेष परियोजना के घर के खरीदार धारा सात के तहत आवेदन करते हैं, तो सीआईआरपी उसी प्रोजेक्ट तक सीमित रहेगी। एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने यह फैसला नवीन एम रहेजा की अपील पर सुनाया है।

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