अच्छी सैलरी के बावजूद लोन रिजेक्ट, कहीं आपका सैलरी अकाउंट तो नहीं बना रुकावट? जानें कैसे?

जब लोन देने से पहले बैंक आपसे आपका सैलरी स्लिप और सैलरी अकाउंट स्टेटमेंट मांगते हैं, तो वे कोई रूटीन पेपरवर्क नहीं कर रहे होते हैं। उस अकाउंट में वे यह पता करते हैं कि आपकी इनकम कितनी और क्या आप लोन रीपेमेंट करने लायक हैं?

अगर आप नौकरीपेशा हैं और बैंक से पर्सनल लोन, कार लोन या होम लोन लेने जाते हैं तो आपसे आपकी सैलरी स्लिप और सैलरी अकाउंट डिटेल मांगी जाती है। बैंक कम से 3 या 6 महीने की सैलरी अकाउंट डिटेल मांगते हैं। इसके अलावा वो आपके सैलरी स्लिप भी मांगते हैं। इसके बाद लोन देने का फैसला करते हैं। कई बार बैंक सैलरी स्लिप और सैलरी अकाउंट स्टेटमेंट लेने के बाद लोन देने से माना कर देते हैं। आखिर, वो ऐसा क्यों करते हैं? आपको लगता होगा कि मेरी मंथली इनकम ठीक है। फिर बैंक ने लोन आवेदन रिजेक्ट क्यों कर दिया? आइए आज इस सवाल का जवाब देते हैं।

Salary Account

सैलरी अकाउंट और लोन

सैलरी अकाउंट से रीपेमेंट क्षमता का आकलन

जब लोन देने से पहले बैंक आपसे आपका सैलरी स्लिप और सैलरी अकाउंट स्टेटमेंट मांगते हैं, तो वे कोई रूटीन पेपरवर्क नहीं कर रहे होते हैं। उस अकाउंट में वे यह पता करते हैं कि आपकी इनकम कितनी और क्या आप लोन रीपेमेंट करने लायक हैं? अगर आपने पहले से लोन ले रहा है और आपका इनकम-एक्सपेंस रेश्यो बहुत दबाब में हैं तो बैंक लोन देने से मना कर सकते हैं। इसलिए एक जैसी सैलरी वाले दो लोन लेने वालों को लोन नतीजे अलग-अलग हो सकते हैं। उदाहरण से समझते हैं कि राम की मंथली सैलरी 60 हजार रुपये मंथली है। उस पर अभी किसी भी तरह के लोन की ईएमआई नहीं है। वहीं श्याम की सैलरी भी 60 हजार है लेकिन उस पर 25 हजार की होम लोन ईएमआई और 15 हजार की कार लोन ईएमआई चल रही है। ऐसे हालात में बैंक उसे कोई बड़ा लोन देने से मना कर सकते हैं।

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