बहुत से लोगों के साथ ऐसा होता है कि उन पर कोई लोन चल रहा होता है और साथ ही वे एसआईपी के जरिए निवेश भी कर रहे होते हैं। हालांकि, सवाल यही कि अगर पहले से होम लोन (Home Loan), पर्सनल लोन (Personal Loan) या किसी दूसरे तरह का कर्ज चल रहा हो तो पहले लोन खत्म किया जाए या निवेश जारी रखा जाए। दरअसल, इस सवाल का जवाब हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं हो सकता है। फैसला मुख्य रूप से लोन की ब्याज दर, SIP से मिलने वाले संभावित रिटर्न, टैक्स और व्यक्ति की वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है।
Loan के साथ-साथ क्या SIP जारी रखें (Photo: iStock)
लोन की ब्याज दर पर दें ध्यान
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपके लोन पर कितनी ब्याज दर लग रही है। अगर लोन की ब्याज दर काफी ज्यादा है, तो उसे जल्दी चुकाने से ब्याज के रूप में होने वाला खर्च कम किया जा सकता है। खासकर पर्सनल लोन जैसे कर्ज में ब्याज दर अधिक हो सकती है। ऐसे मामले में अतिरिक्त रकम से लोन का कुछ हिस्सा चुकाना एक विकल्प हो सकता है।
दूसरी तरफ, SIP के जरिए म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश बाजार से जुड़ा होता है। इसमें रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। लंबे समय में इक्विटी म्यूचुअल फंड ने अच्छा रिटर्न दिया हो सकता है, लेकिन भविष्य का रिटर्न पहले से तय नहीं किया जा सकता। इसलिए केवल अनुमानित 10-12 प्रतिशत रिटर्न की तुलना लोन की ब्याज दर से करके फैसला नहीं करना चाहिए।
SIP कब रख सकते हैं जारी
अगर आपका लोन कम ब्याज दर पर चल रहा है और आपकी आय स्थिर है तो SIP जारी रखते हुए लोन की EMI नियमित रूप से चुकाना एक विकल्प हो सकता है। इससे आपका निवेश लंबे समय तक बना रहता है और कंपाउंडिंग का फायदा मिलने की संभावना रहती है। हालांकि, इसके लिए आपके पास पर्याप्त इमरजेंसी फंड होना जरूरी है।
जरूरी नहीं कि पूरी अतिरिक्त रकम केवल लोन चुकाने या केवल SIP में लगाने पर खर्च की जाए। आप दोनों के बीच संतुलन बना सकते हैं। उदाहरण के लिए, नियमित SIP जारी रखते हुए हर साल मिलने वाले बोनस या अतिरिक्त आय का एक हिस्सा लोन के प्रीपेमेंट में लगाया जा सकता है। इससे निवेश भी चलता रहता है और कर्ज का बोझ भी धीरे-धीरे कम होता है।
दोनों में से कौन-सा ऑप्शन ज्यादा बेहतर
पहले इमरजेंसी फंड तैयार करें, फिर लोन की ब्याज दर, प्रीपेमेंट चार्ज, टैक्स लाभ और निवेश की अवधि देखें। अगर कर्ज महंगा है तो प्रीपेमेंट को प्राथमिकता देना प्रैक्टिकल हो सकता है। वहीं कम ब्याज वाले लोन, लंबी निवेश अवधि और बेहतर वित्तीय सुरक्षा की स्थिति में SIP जारी रखना एक विकल्प हो सकता है। फैसला अपनी आय, जोखिम क्षमता और भविष्य के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर लें।
