AI Factory in India: देश की प्रमुख इंजीनियरिंग और निर्माण कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने बुधवार (18 फरवरी 2026) को दुनिया की अग्रणी एआई और चिप निर्माता कंपनी एनवीडिया के साथ एक संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) बनाने की घोषणा की है। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य भारत में गीगावाट स्तर का ‘एआई फैक्ट्री’ बुनियादी ढांचा तैयार करना है, ताकि देश को वैश्विक स्तर पर एआई महाशक्ति बनाया जा सके। यह पहल ऐसे समय में की गई है जब भारत डिजिटल और औद्योगिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है और बड़े पैमाने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की जरूरत तेजी से बढ़ रही है।
Larsen & Toubro और Nvidia की बड़ी साझेदारी
क्या है इस साझेदारी का मकसद?
इस जॉइंट वेंचर का लक्ष्य उन कंपनियों, स्टार्टअप्स, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के बड़े संगठनों को मजबूत एआई इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना है, जो बड़े पैमाने पर एआई क्षमता विकसित करना चाहते हैं। आसान शब्दों में कहें तो यह पहल ऐसे डेटा सेंटर और तकनीकी ढांचे तैयार करेगी, जहां भारी मात्रा में एआई से जुड़े काम जैसे बड़े मॉडल बनाना, ट्रेनिंग देना और उन्हें चलाना आसानी से किए जा सकेंगे। एलएंडटी अपनी इंजीनियरिंग, निर्माण और बड़े प्रोजेक्ट संभालने की विशेषज्ञता लेकर आएगा, जबकि एनवीडिया अपनी उन्नत एआई तकनीक, जीपीयू, सीपीयू और सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएगा। दोनों कंपनियों की ताकत मिलकर भारत में विश्वस्तरीय एआई बुनियादी ढांचा खड़ा करने का लक्ष्य रखती है।
आधुनिक डेटा सेंटर का निर्माण
बीएसई को दी गई जानकारी में एलएंडटी ने बताया कि यह नया उपक्रम प्राथमिकता वाले क्षेत्रों जैसे विनिर्माण, वित्त, स्वास्थ्य, ऊर्जा और सरकारी सेवाओं के लिए बड़े पैमाने पर एआई वर्कलोड संभालने में सक्षम आधुनिक डेटा सेंटर तैयार करेगा। इन डेटा सेंटर्स को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि वे भविष्य की जरूरतों के हिसाब से आसानी से विस्तारित किए जा सकें। इस पहल का एक अहम पहलू ‘सॉवरेन एआई’ ढांचा है। इसका मतलब है कि भारत के भीतर ही महत्वपूर्ण डेटा और एआई मॉडल विकसित और तैनात किए जाएंगे। इससे डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। साथ ही यह ढांचा वैश्विक स्तर पर भी काम करने में सक्षम होगा।
‘भारत एआई मिशन’ के अनुरूप पहल
यह परियोजना सरकार के ‘भारत एआई मिशन’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य देश को एआई के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। ‘सॉवरेन बाय-डिजाइन’ मॉडल के तहत तैयार होने वाला यह इंफ्रास्ट्रक्चर न सिर्फ घरेलू जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि उन अंतरराष्ट्रीय क्लाउड सेवा प्रदाताओं और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भी आकर्षित करेगा, जो भारत को रणनीतिक एआई हब के रूप में देख रहे हैं।
चेन्नई और मुंबई में विस्तार
इस जॉइंट वेंचर पहल के तहत उच्च घनत्व वाले और अगली पीढ़ी के एआई वर्कलोड को संभालने के लिए गीगावाट स्तर की एआई डेटा सेंटर फैक्ट्री विकसित की जाएगी। चेन्नई में एलएंडटी के 300 एकड़ के परिसर में एनवीडिया जीपीयू क्लस्टर की क्षमता बढ़ाकर 30 मेगावाट की जाएगी। इसके अलावा मुंबई में तैयार किए जा रहे नए 40 मेगावाट डेटा सेंटर में भी एआई क्षमताओं का विस्तार किया जाएगा। इससे देश के दो प्रमुख शहर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े केंद्र के रूप में उभर सकते हैं।
कंपनी प्रमुखों ने क्या कहा?
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक एलएंडटी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एस एन सुब्रह्मण्यन ने कहा कि एनवीडिया के उन्नत एआई मंच और एलएंडटी की मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता को मिलाकर ऐसा ढांचा तैयार किया जा रहा है, जो एआई के जरिए बड़े पैमाने पर आर्थिक प्रभाव पैदा करेगा। उनके अनुसार, यह पहल भारत की तकनीकी प्रगति और औद्योगिक विकास को नई दिशा देगी। वहीं एनवीडिया के संस्थापक और सीईओ जेन्सेन हुआंग ने कहा कि एलएंडटी के साथ मिलकर कंपनी भारत में विश्वस्तरीय एआई बुनियादी ढांचे की नींव रख रही है। उनका मानना है कि यह पहल भारत के विकास को गति देगी और ‘इंडिया एआई’ के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी। कुल मिलाकर, एलएंडटी और एनवीडिया की यह साझेदारी भारत को एआई के क्षेत्र में वैश्विक मानचित्र पर मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
