नई दिल्ली। त्योहारी सीजन में सोने और चांदी के आभूषणों की मांग बढ़ जाती है। दिवाली (Diwali) और धनतेरस (Dhanteras) के समय में इन कीमती धातुओं को खरीदना शुभ माना जाता है। हाल ही में शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए और ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए अधिसूचित जिलों में सोने के आभूषणों के लिए हॉलमार्किंग (Gold Hallmarking) अनिवार्य कर दी गई थी। 1 जून 2022 से ज्वैलर्स सिर्फ हॉलमार्क वाले सोने के आभूषणों को ही बेच सकते हैं, लेकिन चांदी का क्या?
गोल्ड हॉलमार्किंग है जरूरी, लेकिन चांदी का क्या?
क्या चांदी की ज्वैलरी के लिए भी जरूरी है हॉलमार्किंग?
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के नियमों के अनुसार, ज्वैलर्स के लिए चांदी के आभूषण और सिक्कों को बेचने से पहले उन्हें हॉलमार्क करवाना अनिवार्य नहीं है। हालांकि चांदी के लिए हॉलमार्किंग अनिवार्य नहीं है, फिर भी ज्वैलर्स अपनी इच्छा से इसे करवा सकते हैं। सरकार ने स्वैच्छिक चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग के लिए कुछ गुणवत्ता मानक जारी किए हैं। बीआईएस के अनुसार, 'सिल्वर हॉलमार्किंग आईएस 2112: 2014 पर भारतीय मानक सिल्वर अलॉय के छह ग्रेड, अर्थात 990, 970, 925, 900, 835 और 800 को निर्दिष्ट करता है। इनका इस्तेमाल चांदी के आभूषण या कलाकृतियों के निर्माण में किया जाता है।'
चांदी के गहनों पर हॉलमार्किंग के क्या साइन हैं?
ग्राहक ज्वैलर्स से हॉलमार्क वाली चांदी खरीदने का अनुरोध कर सकते हैं। ऐसा खरीदारी के समय किया जाता है। जौहरी को चांदी के आभूषणों को हॉलमार्क करवाने के लिए नजदीकी जांच केंद्र में ले जाना होगा। अगर ज्वैलरी गुणवत्ता मानकों को पूरा करती है, तो इसे बीआईएस नियमों के अनुसार हॉलमार्क किया जाएगा।
- 'सिल्वर' शब्द के साथ BIS मार्क
- शुद्धता ग्रेड
- सेंटर का पहचान चिह्न
- ज्वैलर का चिह्न या निर्माता का पहचान चिह्न
चांदी की शुद्धता को जानना महत्वपूर्ण है क्योंकि ज्वैलर्स आमतौर पर चांदी के आभूषण और बर्तन बनाने के लिए इसमें लेड मिलाते हैं। बहुत से लोग खाने-पीने के लिए चांदी के बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं। अगर लेड की मात्रा ज्यादा होगी तो यह उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगा।
