जापान की गिरती जन्मदर ने वहां की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को एक अनोखे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां अब इंसानी बच्चों की तुलना में पालतू जानवरों की आबादी कई गुना अधिक हो चुकी है। इस जनसांख्यिकीय संकट ने जापानी कंपनियों को अपना पूरा बिजनेस मॉडल बदलने पर मजबूर कर दिया है। बच्चों के खिलौने और डायपर बनाने वाले बड़े ब्रांड्स अब अपना प्रोडक्शन समेटकर पालतू जानवरों के लिए प्रीमियम प्रोडक्ट्स बना रहे हैं, क्योंकि जापान में जहां बच्चों का बाजार लगातार सिकुड़ रहा है, वहीं पेट-केयर इंडस्ट्री मुनाफे के सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है।
जापान में बच्चों के लिए खिलौने और डायपर बनाने वाली कंपनियां अब पालतू जानवरों के लिए बना रही हैं सामान, आखिर क्यों?
बदल गया बिजनेस मॉडल
जापान की मशहूर डायपर निर्माता कंपनी 'ओजी होल्डिंग्स' (Oji Holdings) ने देश में बच्चों के डायपर की घटती मांग को देखते हुए इसका प्रोडक्शन पूरी तरह बंद कर दिया है और अब वह अपना पूरा फोकस पेट-डायपर (Pet Diapers) और पेट-केयर सेगमेंट पर लगा रही है। कंपनियों का यह यू-टर्न कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक बेहद मुनाफे वाला रणनीतिक फैसला है, क्योंकि जापान में जहां बच्चों का बाजार लगातार सिकुड़ रहा है, वहीं पेट-केयर इंडस्ट्री (Pet-Care Industry) में एक अभूतपूर्व और रिकॉर्डतोड़ उछाल (Boom) देखा जा रहा है।
क्यों बदला बिजनेस का तरीका?
इस बदलाव के पीछे जापान का गहराता हुआ अकेलापन और बदलती लाइफस्टाइल सबसे बड़ी वजह है। जापान की युवा आबादी शादी करने और बच्चे पैदा करने से कतरा रही है, जिसके कारण देश की आबादी लगातार बूढ़ी हो रही है और जन्मदर अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। ऐसे में जापानी नागरिक अकेलेपन को दूर करने के लिए बच्चों के बजाय पालतू जानवरों को अपने परिवार का हिस्सा बना रहे हैं और उन्हें अपने सगे बच्चों की तरह ही लाड़-प्यार दे रहे हैं। जापानी समाज में पालतू जानवरों को अब महज 'Pet' नहीं बल्कि 'Family Member' का दर्जा हासिल है, जिसके चलते लोग उनकी सुख-सुविधाओं और सेहत पर पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं।
इसी का नतीजा है कि बच्चों के खिलौने बनाने वाली जापानी कंपनियां अब पालतू जानवरों के मानसिक विकास के लिए 'स्मार्ट पेट टॉयज' बना रही हैं, और फूड कंपनियां उनके लिए ऑर्गेनिक, न्यूट्रिएंट-रिच और कस्टमाइज्ड पेट-फूड तैयार कर रही हैं। इतना ही नहीं, जापानी पेट-केयर मार्केट में अब बुजुर्ग हो चुके पालतू जानवरों के लिए विशेष व्हीलचेयर, नर्सिंग होम, और उनके अंतिम संस्कार के लिए लग्जरी फ्यूनरल सर्विसेज तक की मांग तेजी से बढ़ रही है।
अरबों डॉलर की हुई इंडस्ट्री
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, जापान का पेट-केयर उद्योग अब कई अरब डॉलर का बड़ा बाजार बन चुका है और यह लगातार बढ़ रहा है। ओजी होल्डिंग्स के अलावा यूनीचार्म (Unicharm) जैसी बड़ी जापानी कंपनियां, जो पहले केवल बेबी केयर और हाइजीन प्रोडक्ट्स के लिए जानी जाती थीं, वे भी अब पेट-डायपर और एंटी-बैक्टीरियल पेट शीट्स के ग्लोबल मार्केट पर कब्जा जमाने में जुटी हैं। जापान के इस बदलते बाजार ने दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों और समाजशास्त्रियों को चौंका दिया है, क्योंकि यह दिखाता है कि कैसे एक देश की जनसांख्यिकी (Demographics) वहां के पूरे व्यापारिक परिदृश्य को बदल सकती है।
टोक्यो की हालत अब यह हो चुकी है कि वहां इंसानी बच्चों के कपड़े और जरूरत की चीजें खोजने में भले ही मुश्किल हो जाए, लेकिन कुत्तों के लिए कपड़े और अन्य सामान बेहद आसानी से मिल जाते हैं। मार्केट इंटेलिजेंस कंपनी यूरोमॉनिटर (Euromonitor) के अनुसार, साल 2020 में जापान का पेट-केयर (पालतू जानवरों का) मार्केट 689.6 अरब येन (लगभग $4.2 बिलियन) का था, जो साल 2025 में बढ़कर 880 अरब येन (लगभग $5.4 बिलियन) का हो गया है। महज 5 सालों के भीतर पालतू जानवरों के सामान और उनकी देखभाल से जुड़ा बिजनेस करीब $1.2 बिलियन (यानी लगभग 200 अरब येन) बढ़ गया है।
तेजी से बढ़ रहे हैं पेट
साल 2014 के आंकड़ों के मुताबिक, जापान में 15 साल तक के बच्चों की संख्या लगभग 16.5 मिलियन थी, जबकि पालतू कुत्तों और बिल्लियों की तादाद 21.3 मिलियन तक पहुंच चुकी थी। यह साफ दिखाता है कि जापान में पालतू जानवर अब बच्चों की जगह ले रहे हैं। वहां के जोड़ों में संतान पैदा करने का चाव भी लगातार कम हुआ है, जिसकी कई वजहों में से एक बड़ी वजह जापानियों का अपने काम के प्रति अत्यधिक जुनून (ऑब्सेशन) माना जाता है। स्थिति यह है कि जापान में लोग छुट्टियां लेने से इस कदर बचते हैं कि खुद कंपनियों को नियम बनाना पड़ा कि हर कर्मचारी को सालाना कम से कम 14 दिनों की छुट्टी लेनी ही होगी, ताकि उनका मानसिक स्वास्थ्य ठीक रह सके।
