Japan Crisis: आखिर क्या था जापान का ‘Zero Rule’? हटते ही कैसे बिगड़ गए हालात

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  • Updated Nov 21, 2025, 10:19 AM IST

जापान इस समय गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है, और इसकी सबसे बड़ी वजह है वह नियम जिसे ‘Zero Rule’ कहा जाता था। तीन दशक तक जापान की मजबूत आर्थिक ताकत माने जाने वाले इस नियम को हटाते ही हालात बिगड़ गए ब्याज दरें बढ़ीं, बाजार हिले और पूरे सिस्टम में हड़कंप मच गया। आइए जानते हैं आखिर यह ज़ीरो रूल था क्या और इसे खत्म होते ही ऐसा क्या हुआ कि जापान की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गई?

जापान इस समय एक बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है, और इसकी सबसे बड़ी वजह है देश का वह नियम जिसे ‘Zero Rule’ कहा जाता था। यह नियम लगभग 30 साल से जापान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी का काम कर रहा था। लेकिन जैसे ही इस नियम को हटाया गया, बाजारों में हलचल मच गई, ब्याज दरें बढ़ने लगीं, और पूरा आर्थिक सिस्टम दबाव में आ गया। आखिर क्या था यह ज़ीरो रूल और इसे हटते ही हालात कैसे बिगड़ गए?

Japan Crisis

क्या है जीरो रूल?

जापान पिछले तीन दशकों से शून्य ब्याज दर (Zero Interest Rate Policy) पर चल रहा था। इस नियम के तहत बैंक लोन बेहद सस्ते में मिलते थे, क्योंकि ब्याज दर लगभग शून्य थी। इससे कंपनियों को निवेश करने में आसानी होती थी और सामान्य लोगों पर EMI का बोझ भी कम रहता था। यही वजह थी कि जापान की अर्थव्यवस्था लंबे समय तक कम ब्याज दरों के सहारे चलती रही। इस नियम के कारण आर्थिक गतिविधियाँ चलती रहीं और देश की ग्रोथ किसी न किसी तरह टिके रहने में सफल रही।

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