आयकर रिटर्न (Istock)
ITR Filling: देश में कोरोना महामारी के बाद शेयर बाजार में निवेश करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसके चलते डीमैट खातों की संख्या करोड़ों में पहुंच गई है। शेयर बाजार में निवेशकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आययकर विभाग ने अपने इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म में कई बदलाव किए हैं। ऐसे में अगर आप अपना आयकर रिटर्न फाइल करने की योजना बना रहे हैं तो कई बातों का खास ख्याल रखना होगा और सही जानकारी रिटर्न फाइल करते वक्त देनी होगी। बताते चलें कि शेयरों की बिक्री से होने वाला मुनाफा, डिविडेंड इनकम, अल्पकालिक पूंजीगत लाभ (STCG) और दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) आयकर अधिनियम, 1961 के अनुसार टैक्सेबल हैं। आइए जानते हैं कि अगर आपके पास डीमैट अकाउंट है तो आयकर रिटर्न फाइल करते वक्त किन बातों का ख्याल जरूर रखें।
इन 5 बातों की जरूर रखें ख्याल
- आपको बता दें कि डीमैट खाता खुलने के तुरंत बाद (पैन और आधार लिंक) आयकर विभाग को सूचना मिल जाती है। इसलिए रिटर्न फाइल करते वक्त इक्विटी से होने वाली आय को छुपाने की कोशिश नहीं करें। ऐसे करने से आपको आयकर विभाग का नोटिस मिल सकता है।
- डीमैट खाते से हुई आय घोषित करने के लिए, अपने बैंक या ब्रोकर से ब्योरा लें और अपने डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (डीपी) यानी एनएसडीएल या सीडीएसएल से लेनदेन विवरण प्राप्त कर सकते हैं। इसके बाद इसकी जानकारी रिटर्न फाइल में दें।
- जानकारी के लिए बता दें कि आप अपने आयकर अकाउंट में लॉगइन कर डीमैट अकाउंट को वेरिफाई कर सकते हैं। इसके लिए आपको आयकर फाइलिंग अकाउंट में लॉग इन करना होगा और डीमैट खाते को सत्यापित करना होगा।
- शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स होने पर 15 प्रतिशत की दर से प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) लगाया जाता है, भले ही आपकी कुल आय छूट स्तर से कम हो। वहीं, 12 महीने से अधिक की अवधि के लिए रखी गई प्रतिभूतियों पर अर्जित लाभ को LTCG माना जाता है, ₹1 लाख से अधिक के किसी भी लाभ पर अर्जित राशि का 10 प्रतिशत कर लगाया जाता है।
- डिविडेंड आय पर अलग से कोई टैक्स नहीं लगता है। इसपर टैक्स की दर आपके आयकर स्लैब के अनुसार होती है। आपको आईटीआर फाइल करते समय आईटीआर-1 फॉर्म (यदि कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं है), आईटीआर-2 फॉर्म (यदि आपकी कोई बिजनेस इनकम नहीं है), या आईटीआर-3 फॉर्म (यदि ट्रेडिंग आपका बिजनेस है) का उपयोग कर सकते हैं।
