ईरान-अमेरिका युद्ध से भारत की GDP पर बुरा असर, विकास दर में इतनी कमी की आशंका

रिपोर्ट कहती है कि मार्च से अनिश्चितता में तेज बढ़ोतरी होने की आशंका है। हमें लगता है कि इससे भारत में निवेश हतोत्साहित होगा, जिससे ईयू और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौतों का सकारात्मक प्रभाव आंशिक रूप से कम हो सकता है।

ईरान-US युद्ध का असर भारती अर्थव्यवस्था पर भी हो सकता है। फिच ग्रुप की इकाई बीएमआई ने मंगलवार को कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष भारत में निवेश को प्रभावित कर सकता है और यूरोपीय संघ एवं अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौतों से मिलने वाले सकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है। 'इंडिया आउटलुक’ रिपोर्ट में कहा कि अगर ईरान संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत की वृद्धि होती है तो इससे भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर लगभग 0.3 से 0.6 प्रतिशत अंक तक का नकारात्मक असर पड़ सकता है। रिपोर्ट कहती है कि खासकर दक्षिण एशिया जैसे तेल आयातक देशों पर इस संकट का अधिक प्रभाव पड़ने का अनुमान है।

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ईरान-अमेरिका युद्ध

अगले वित्त वर्ष के अनुमान में कोई बदलाव नहीं

हालांकि, शोध एवं विश्लेषण इकाई बीएमआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान सात प्रतिशत पर बरकरार रखा है, जो चालू वित्त वर्ष के लिए अनुमानित 7.9 प्रतिशत वृद्धि से कम है। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च से अनिश्चितता में तेज वृद्धि हो सकती है, क्योंकि पश्चिम एशिया संघर्ष से निवेश धारणा प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट कहती है, "मार्च से अनिश्चितता में तेज बढ़ोतरी होने की आशंका है। हमें लगता है कि इससे भारत में निवेश हतोत्साहित होगा, जिससे ईयू और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौतों का सकारात्मक प्रभाव आंशिक रूप से कम हो सकता है।"

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