दुनिया के ऊर्जा बाजार में इस वक्त जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर बढ़ने की खबरों के बावजूद, कच्चे तेल (Crude oil) की कीमतों ने $100 प्रति बैरल का स्तर पार कर लिया है। खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड आयल की कीमत 102.21 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है, इस तेजी की सबसे बड़ी वजह 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) को लेकर बढ़ा तनाव है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग पर मंडराते खतरों ने निवेशकों और तेल कंपनियों के हाथ-पांव फुला दिए हैं। अगर यह तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में कच्चा तेल $150 प्रति बैरल तक भी पहुंच सकता है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी बड़ी तबाही से कम नहीं होगा।
हॉर्मुज की नाकाबंदी और टैंकरों का अपहरण
ताजा खबरों के अनुसार, ईरान ने 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' के पास से गुजरने वाले दो व्यापारिक टैंकरों को अपने कब्जे में ले लिया है। इस घटना ने आग में घी डालने का काम किया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य वह रास्ता है जहां से दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब 20% हिस्सा गुजरता है। ईरान द्वारा इस मार्ग पर बढ़ती सख्ती और टैंकरों के पकड़े जाने से फारस की खाड़ी के प्रमुख उत्पादक देशों का निर्यात लगभग ठप होने की कगार पर है। आपूर्ति में इस भारी गिरावट के डर ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को आसमान पर पहुँचा दिया है।
सीजफायर पर मंडराता खतरा
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ शांति की बातचीत की चर्चा हो रही है, तो दूसरी तरफ समुद्र में युद्ध जैसी तैयारी दिख रही है। अमेरिका ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए समुद्र में ईरान की घेराबंदी कर दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे सीजफायर का खुला उल्लंघन बताया है। ईरान का दावा है कि अमेरिका की यह घेराबंदी शांति समझौते की शर्तों के खिलाफ है। इस आरोप-प्रत्यारोप ने एक बार फिर से युद्ध का खतरा बढ़ा दिया है। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी प्रकार की शांति वार्ता सफल होती नजर नहीं आ रही है, जिससे सीजफायर कभी भी टूटने का अंदेशा बना हुआ है।
आपूर्ति का डर और बाजार में हड़कंप
तेल बाजार हमेशा अनिश्चितता और जोखिम पर प्रतिक्रिया देता है। फारस की खाड़ी से होने वाले निर्यात में आई गिरावट ने पूरी दुनिया के सप्लाई चेन को हिला कर रख दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हॉर्मुज का रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है, तो बाजार में कच्चे तेल की भारी किल्लत हो जाएगी। यही कारण है कि 'ब्रेंट क्रूड' और 'WTI' दोनों के भाव तेजी से बढ़ रहे हैं। दुनिया भर के शेयर बाजारों में भी इस वजह से गिरावट देखी जा रही है, क्योंकि तेल महंगा होने का मतलब है परिवहन, खेती और मैन्युफैक्चरिंग का महंगा होना, जिससे महंगाई बढ़ेगी।
क्या $150 के पार जाएगा क्रूड ऑयल?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कच्चा तेल $150 के ऐतिहासिक स्तर को पार करेगा? कई ग्लोबल मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच पूर्ण युद्ध छिड़ता है या हॉर्मुज मार्ग स्थायी रूप से अवरुद्ध होता है, तो $150 का स्तर भी पीछे छूट सकता है। भारत जैसे देश के लिए यह स्थिति बहुत खतरनाक होगी, क्योंकि हम अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करते हैं। तेल की कीमतों में यह 'ब्लास्ट' सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर असर डालेगा और पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड तोड़ सकती हैं।
