अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद पूरा मिडिल ईस्ट अस्थिर हो गया है। इसका सबसे बुरा असर कच्चे तेल की सप्लाई पर हुआ है। ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इस बीच फिर से चर्चा शुरू कर दी है कि क्या इन्वेस्टर को ग्लोबल अनिश्चितता से बचने के लिए एनर्जी से जुड़े इन्वेस्टमेंट में अपना एक्सपोजर बढ़ाना चाहिए। मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि जियोपॉलिटिकल घटनाओं से क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल के दौरान एनर्जी ETF को फायदा हो सकता है, लेकिन वे टैक्टिकल मैक्रो एक्सपोजर दिखाते हैं। दूसरा तरीका एनर्जी-फोकस्ड म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करना है। डेटा से पता चलता है कि एनर्जी स्कीम में एक साल का परफॉर्मेंस मजबूत रहा है।
एनर्जी ईटीएफ
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से संकट बढ़ा
ईरान-इजरायल युद्ध के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद करने का ऐलान किया है। होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई में रुकावट के डर से कुछ ही दिनों में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। आपको बता दें कि यह एक ऐसा रास्ता है जो दुनिया भर में तेल के फ्लो का 20 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा संभालता है। अभी भी अनिश्चितता की वजह से कीमतें ऊंची रह सकती हैं।
निवेश की क्या है सही रणनीति?
विशेषज्ञों के अनुसार ऊर्जा सेक्टर में निवेश टैक्टिकल (ताकतवर लेकिन अस्थायी) अवसर हो सकता है। इसलिए निवेश में इन बातों का खास ख्याल रखें:—
- पोर्टफोलियो का छोटा हिस्सा रखें: ऊर्जा फंड में कुल इक्विटी निवेश का लगभग 5–15% से ज्यादा नहीं रखना चाहिए।
- SIP के जरिये निवेश करें: एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय धीरे-धीरे निवेश बेहतर होगा।
- तेल की कीमतों पर नजर रखें: Energy funds का प्रदर्शन काफी हद तक क्रूड ऑयल के दाम पर निर्भर करता है।
- लंबी अवधि का नजरिया रखें: केवल युद्ध या खबर देखकर जल्दबाजी में निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।
जोखिम का जरूर ख्याल रखें
एक्सपर्ट शॉर्ट-टर्म जियोपॉलिटिकल रैलियों का पीछा करने को लेकर चेतावनी भी दे रहे हैं। एनर्जी फंड सेक्टोरल फंड होते हैं, जिसका मतलब है कि उनमें डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड की तुलना में ज्यादा वोलैटिलिटी और कंसंट्रेशन रिस्क होता है। तेल की कीमतें साइक्लिकल रहती हैं और ग्लोबल ग्रोथ और सप्लाई डायनामिक्स से करीब से जुड़ी होती हैं, जिसका मतलब है कि युद्ध के दौरान होने वाले फ़ायदे तनाव कम होने पर जल्दी कम हो सकते हैं। इसलिए निवेश से पहले जोखिम का आकलन जरूर करें। निवेशकों के लिए, एनर्जी फंड कोर पोर्टफोलियो होल्डिंग के बजाय टैक्टिकल एलोकेशन के तौर पर बेहतर काम कर सकते हैं। इक्विटी एलोकेशन के लगभग 5-15 प्रतिशत तक एक्सपोजर को लिमिट करके और धीरे-धीरे इन्वेस्ट करके रिस्क और मौके को बैलेंस करने में मदद मिल सकती है।
(डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या सोना-चांदी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।)
