ईरान संकट का इंडियन इकोनॉमी पर असर नहीं, S&P ने GDP अनुमान बढ़ाकर इतना किया

एसएंडपी ने कहा कि हमारा अनुमान है कि 31 मार्च 2027 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.1 प्रतिशत रहेगी, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। मजबूत निजी खपत, निजी निवेश में मध्यम सुधार और ठोस निर्यात इसके मुख्य चालक होंगे।

ईरान संकट और कच्चे तेल में उछाल से पूरी दुनिया की रफ्तार कम होने की आशंका है। हालांकि,भारतीय इकोनॉमी पर इसका असर होता नहीं दिख रहा है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि निजी खपत, निवेश एवं निर्यात वृद्धि के प्रमुख चालक रहेंगे। हालांकि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष से ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के कारण वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ सकता है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर अपनी नवीनतम त्रैमासिक आर्थिक टिप्पणी में एसएंडपी ने कहा कि नए भू-राजनीतिक तनाव और लगातार बने व्यापार संबंधी अनिश्चितता के जोखिम से भारत पर वस्तु कीमतों, व्यापार मात्रा एवं पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव के माध्यम से असर पड़ सकता है। इसमें कहा गया कि यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो भारत में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं, ताकि सब्सिडी लागत को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि कीमतों का पूरा असर उपभोक्ताओं तक पहुंचने के आसार नहीं हैं।

India GDP Rate

जीडीपी ग्रोथ रेट (AI Iamge)

महंगाई बढ़ने का अनुमान

एसएंडपी ने कहा कि हमारा अनुमान है कि 31 मार्च 2027 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.1 प्रतिशत रहेगी, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। मजबूत निजी खपत, निजी निवेश में मध्यम सुधार और ठोस निर्यात इसके मुख्य चालक होंगे। एजेंसी ने 2025-26 के वृद्धि अनुमान को 0.4 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 7.6 प्रतिशत और 2026-27 के लिए 0.2 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। एसएंडपी के अनुसार, महंगाई के कम स्तर से सामान्य पर आने से वित्त वर्ष 2026-27 में इसके बढ़कर 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

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