अगर आप रियल एस्टेट में निवेश करना चाहते हैं, लेकिन घर या जमीन खरीदने के लिए आपके पास ज्यादा पैसे नहीं हैं, तो रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट यानी REIT एक विकल्प हो सकता है। इसके जरिए निवेशक सीधे कोई प्रॉपर्टी खरीदे बिना भी रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश कर सकते हैं। REIT ऐसी संस्था होती है, जो आमतौर पर किराये से कमाई करने वाली व्यावसायिक संपत्तियों, जैसे ऑफिस, मॉल और अन्य कमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश करती है। इन संपत्तियों से होने वाली आय का एक हिस्सा निवेशकों को मिल सकता है।
बिना जमीन या घर खरीदे रियल एस्टेट में करें निवेश!
कम पैसों से कैसे करें निवेश?
REIT में निवेश करने का तरीका शेयर बाजार में शेयर खरीदने जैसा होता है। भारत में सूचीबद्ध REIT की यूनिट्स स्टॉक एक्सचेंज पर खरीदी और बेची जा सकती हैं। इसके लिए आमतौर पर डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट की जरूरत होती है। निवेशक ब्रोकर के माध्यम से यूनिट्स खरीद सकते हैं। हालांकि, निवेश की न्यूनतम रकम यूनिट की कीमत, उपलब्धता और लागू नियमों पर निर्भर करती है। इसलिए ₹500 से निवेश शुरू करने का दावा करने से पहले संबंधित REIT की मौजूदा कीमत और न्यूनतम खरीद की शर्तें जरूर जांचनी चाहिए।
REIT में निवेश करने के क्या हैं फायदे?
REIT का सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेशक को खुद प्रॉपर्टी खरीदने, उसकी देखभाल करने या किरायेदार खोजने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके अलावा, अलग-अलग संपत्तियों में निवेश करने वाली REIT के जरिए कमर्शियल रियल एस्टेट में हिस्सेदारी मिल सकती है। कुछ REIT अपनी आय का हिस्सा निवेशकों को डिस्ट्रीब्यूशन के रूप में देती हैं। इससे निवेशकों को नियमित आय मिलने की संभावना रहती है। हालांकि, यह आय तय या गारंटीड नहीं होती और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है।
FD, SIP और REIT में क्या है अंतर?
फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD में बैंक तय शर्तों के अनुसार ब्याज देता है। म्यूचुअल फंड में SIP निवेश करने का तरीका है, जिसमें नियमित अंतराल पर पैसा लगाया जाता है। वहीं, REIT के जरिए निवेशक रियल एस्टेट से जुड़ी संपत्तियों में निवेश करते हैं। तीनों के जोखिम, रिटर्न और पैसे निकालने की शर्तें अलग-अलग होती हैं। FD में रिटर्न आमतौर पर पहले से तय होता है, जबकि REIT की यूनिट की कीमत बाजार में ऊपर-नीचे हो सकती है। म्यूचुअल फंड का जोखिम उसके प्रकार और निवेश की रणनीति पर निर्भर करता है।
निवेश से पहले किन बातों का रखें ध्यान?
REIT में निवेश करने से पहले उसकी संपत्तियों, किराये से होने वाली कमाई, कर्ज, प्रबंधन और पिछले प्रदर्शन की जानकारी देखनी चाहिए। यूनिट की कीमत गिरने से नुकसान हो सकता है और मिलने वाला डिस्ट्रीब्यूशन भी बदल सकता है। इसके अलावा, डिस्ट्रीब्यूशन के अलग-अलग हिस्सों पर टैक्स का नियम अलग हो सकता है। इसलिए निवेश से पहले टैक्स संबंधी जानकारी समझना जरूरी है। केवल कम रकम से निवेश शुरू होने के आधार पर फैसला न लें। अपनी आर्थिक जरूरतों, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखकर ही REIT में पैसा लगाएं।
