भारत की वृद्धि की गति को बनाए रखने के लिए संस्थागत सुधार, राजकोषीय मजबूती महत्वपूर्ण: सीआईआई

सीआईआई ने सरकार को कर चोरी का पता लगाने के लिए अत्याधुनिक विश्लेषण तरीकों का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया। उसने तर्क दिया कि देश को वर्तमान 17.5 प्रतिशत (केंद्र एवं राज्यों को मिलाकर) के कर-जीडीपी अनुपात को बढ़ाने की आवश्यकता है।

उद्योग मंडल सीआईआई ने सरकार से देश की वृद्धि की गति को बनाए रखने के लिए आगामी बजट में संस्थागत सुधारों और राजकोषीय मजबूती को बढ़ावा देने का बृहस्पतिवार को आग्रह किया। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने भारत की वृहद आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने के लिए तैयार की गई रणनीति में ये सुझाव दिए। यह रणनीति ऋण स्थिरता, राजकोषीय पारदर्शिता, राजस्व जुटाने और व्यय दक्षता जैसे प्रमुख तत्वों पर आधारित है।

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सीआईआई ने साथ ही कहा कि इसके समानांतर पूर्ण निजीकरण के प्रयास जारी रहने चाहिए। (फोटो क्रेडिट-iStock)

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, ‘‘ भारत ने उच्च वृद्धि दर, कम मुद्रास्फीति एवं बेहतर राजकोषीय संकेतकों का एक दुर्लभ संगम हासिल किया है। आगामी केंद्रीय बजट को अनुशासित राजकोषीय प्रबंधन एवं गहन संस्थागत सुधारों के माध्यम से इस गति को बनाए रखना होगा।’’ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में 2026-27 का केंद्रीय बजट फरवरी में पेश कर सकती हैं।

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