नागपुर के खेतों से ग्राउंड रिपोर्ट : सब्जियां के भाव आसमान पर, किसान के जेब खाली क्यों?

किसानों का कहना है कि खेती करना लगातार महंगा होता जा रहा है। DAP, यूरिया और दूसरी खादों के साथ-साथ मजदूरी का खर्च भी बढ़ गया है। किसानों के मुताबिक कई बार खाद की उपलब्धता भी समस्या बन जाती है।

महंगाई की चर्चा हर तरफ है। सब्जियों से लेकर खाद, बीज, मजदूरी और डीजल तक की कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन सवाल यह है कि इस बढ़ती महंगाई का फायदा आखिर किसान को कितना मिल रहा है? इसी सवाल का जवाब जानने के लिए टाइम्स नाउ नवभारत की टीम नागपुर के कन्हान इलाके में पहुंची, जहां बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती होती है। खेतों में मौजूद किसानों से बातचीत में एक बात साफ तौर पर सामने आई, बाजार में सब्जियां महंगी जरूर हैं, लेकिन किसानों की आमदनी उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है।

बाजार में 60-70 रुपये किलो, किसान को सिर्फ 20 रुपये

बाजार में 60-70 रुपये किलो, किसान को सिर्फ 20 रुपये

15-20 साल से लागत बढ़ने की शिकायत

कन्हान के किसान प्रफुल ने बताया कि पिछले 15-20 वर्षों से किसान लगातार अपनी उत्पादन लागत बढ़ने की शिकायत कर रहे हैं। उनके मुताबिक खेती में बीज, खाद, दवाइयों और मजदूरी का खर्च लगातार बढ़ा है, लेकिन फसल बेचने पर मिलने वाला पैसा उस अनुपात में नहीं बढ़ा।

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