Indian Forex Reserves : वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल जियोपॉलिटिकल तनाव और बढ़ती महंगाई के बावजूद भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) में जबरदस्त उछाल आया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 14 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में भारत का कुल फॉरेक्स रिजर्व बढ़कर 716.91 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। यह बीते 6 महीनों का सबसे उच्चतम स्तर है, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए एक मजबूत कवच प्रदान किया है।
आरबीआई की तिजोरी में झमाझम डॉलर! भारत का फॉरेक्स रिजर्व 700 अरब डॉलर के पार
फॉरेक्स रिजर्व में 10 अरब डॉलर की तेज बढ़ोतरी
हालिया आंकड़ों के मुताबिक, केवल एक सप्ताह के भीतर भारत के मुद्रा भंडार में करीब 10 अरब डॉलर की भारी बढ़त दर्ज की गई है। इस बड़ी वृद्धि का मुख्य श्रेय केंद्रीय बैंक की फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) को जाता है, जिसमें अकेले 7.2 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों और मांग में हुए बदलावों के कारण भारत के पास मौजूद गोल्ड रिजर्व (सोने के भंडार) के मूल्य में भी 2.7 अरब डॉलर की बढ़त दर्ज की गई है।
सात हफ्तों में 50 अरब डॉलर का उछाल
केंद्रीय बैंक द्वारा देश के भुगतान संतुलन को मजबूत करने के लिए उठाए गए ठोस नीतिगत कदमों का सीधा असर फॉरेक्स डेटा पर दिख रहा है। पिछले सात हफ्तों के दौरान रिजर्व बैंक के खजाने में करीब 50 अरब डॉलर की अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस शानदार तेजी के साथ भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अब अपने सर्वकालिक रिकॉर्ड उच्च स्तर (728.5 अरब डॉलर), जो चालू वर्ष के फरवरी महीने में दर्ज किया गया था। उसके बेहद करीब पहुंच गया है।
भारत में 57 अरब डॉलर का बंपर निवेश
आरबीआई की घोषणा के अनुसार, 13 अगस्त तक केंद्रीय बैंक के नीतिगत उपायों के जरिए देश में करीब 57 अरब डॉलर का बड़ा निवेश प्राप्त हुआ है। इसमें से 50 अरब डॉलर से अधिक की राशि विदेशी मुद्रा जमा के रूप में आई है। बाजार में विदेशी मुद्रा के इस भारी इनफ्लो को देखते हुए आरबीआई ने अपनी डिपॉजिट हेजिंग सुविधा को निर्धारित समय से एक महीने पहले, यानी 31 अगस्त को ही बंद करने का फैसला लिया है।
टॉप 5 देशों में भारत की स्थिति और चीन का दबदबा
आईएमएफ डेटा के मुताबिक फॉरेक्स रिजर्व के मामले में भारत दुनिया के टॉप 5 सबसे मजबूत देशों में मजबूती से काबिज है। इस वैश्विक लिस्ट में 3.39 ट्रिलियन डॉलर के विशाल भंडार के साथ चीन पहले स्थान पर बना हुआ है। वहीं, 1.26 ट्रिलियन डॉलर के साथ जापान दूसरे और 0.93 ट्रिलियन डॉलर के साथ स्विट्जरलैंड तीसरे स्थान पर है। रूस 0.75 ट्रिलियन डॉलर के साथ चौथे स्थान पर मौजूद है, जबकि भारत 716.9 अरब डॉलर (लगभग 0.717 ट्रिलियन डॉलर) के विशाल भंडार के साथ दुनिया में 5वें स्थान पर मजबूती से डटा हुआ है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह वृद्धि बेहद राहत देने वाली है, क्योंकि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार न केवल भारतीय रुपये को स्थिरता प्रदान करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर व्यापारिक चुनौतियों के बीच देश की साख को भी ऊंचा बनाए रखता है।
