Petrol-Diesel News : भारत सरकार ने देश से बाहर भेजे जाने वाले ईंधन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी) को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, डीजल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में 3 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF यानी हवाई ईंधन) पर 50 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है।
सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर शुल्क पूरी तरह खत्म किया
नई दरों के तहत हुए बड़े बदलाव
बदली हुई दरों के लागू होने के बाद अब पेट्रोल के निर्यात पर शून्य शुल्क लगेगा, जो पहले 2.50 रुपये प्रति लीटर था। इसके विपरीत, डीजल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क को 8.50 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 11.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसी तरह हवाई ईंधन (ATF) के निर्यात पर ड्यूटी 10.50 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है।
क्यों लागू की गई थी निर्यात ड्यूटी?
यह निर्यात शुल्क सबसे पहले मार्च के अंत में लागू किया गया था। उस समय मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की आपूर्ति बाधित हो गई थी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें काफी बढ़ गई थीं। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह था कि घरेलू तेल रिफाइनरी कंपनियां विदेश में ऊंचे दामों पर ईंधन बेचने के लालच में भारतीय बाजार और घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों की अनदेखी न करें।
होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रभाव
मिडिल ईस्ट में संघर्ष शुरू होने से पहले, भारत का लगभग 45 प्रतिशत कच्चा तेल 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के रास्ते आता था। यह फारस की खाड़ी (पर्शियन गल्फ) को दुनिया के बाकी बाजारों से जोड़ने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस मार्ग पर व्यापारिक जहाजों की आवाजाही में रुकावट आने के कारण भारत को तेल की आपूर्ति के लिए अन्य नए स्रोतों और देशों का रुख करना पड़ा।
घरेलू उपभोक्ताओं को सुरक्षा देने का प्रयास
यह नया संशोधन ऐसे समय में आया है जब भारत पश्चिमी एशिया के युद्ध से उत्पन्न चुनौतियों से लगातार निपट रहा है। इस तनाव की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है, जहाजों का किराया और जोखिम बढ़ा है तथा अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। भारत सरकार का प्रयास रहा है कि घरेलू उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार के झटकों से बचाया जा सके। इसी रणनीति के तहत पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर रखते हुए निर्यात शुल्क के जरिए कंपनियों द्वारा विदेश भेजे जाने वाले ईंधन की मात्रा को नियंत्रित किया जा रहा है।
