ईरान युद्ध और होर्मुज ब्लॉकेज ने भारत को तेल भंडारण को लेरक बड़ा सबक दिया है। इससे सीख लेते हुए भारत ने जून महीने में रिकॉर्ड कच्चे तेल का आयात कर अपना भंडार भर लिया है। केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बीच जून में प्रतिदिन 49.3 लाख बैरल (बीपीडी) कच्चे तेल का आयात किया, जो उस महीने के लिए अब तक का सबसे अधिक रिकॉर्ड है।
कच्चे तेल का आयात
49.3 लाख बैरल (बीपीडी) = कितना
- 49.3 लाख बैरल प्रतिदिन
- यानी 49,30,000 बैरल हर दिन।
- 1 बैरल = 159 लीटर तो
- 49,30,000 × 159 = 78,38,70,000 लीटर प्रतिदिन
- यानी लगभग 78.39 करोड़ लीटर कच्चा तेल प्रतिदिन।
रूस से सबसे अधिक आया तेल
केप्लर के विश्लेषक सुमित रितोलिया ने बताया कि इस दौरान रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़कर लगभग 26 लाख बैरल प्रति दिन हो गया, जिससे रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा। रूस से आयात जून में भारत के कुल तेल आयात का आधे से अधिक रहा, जबकि मई में यह 36.5 प्रतिशत था। भारत ने रूस से 21.3 लाख बैरल प्रति दिन आयात किया था। रूस 2022-23 से भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, क्योंकि यूरोपीय देशों द्वारा रूस से आयात घटाने के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने रियायती रूसी तेल की खरीद बढ़ा दी थी।
पिछले 100 दिनों में रिकॉर्ड खरीदारी
रितोलिया ने कहा कि पिछले 100 दिन में भारत के कच्चे तेल आयात ने उल्लेखनीय तेजी दिखाई है। भारत प्रमुख आयातकों में सबसे बेहतर स्थिति में रहा है, जिसने सक्रिय विविधीकरण और खरीद रणनीति के माध्यम से आपूर्ति को बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि भारतीय रिफाइनरियों ने अगस्त के पहले हिस्से तक के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति पहले ही सुरक्षित कर ली है, क्योंकि सामान्यतः तेल की खरीद एक-दो महीने पहले कर ली जाती है।
ईरान से अभी खरीदारी की उम्मीद नहीं
रितोलिया ने कहा कि निकट भविष्य में ईरान के कच्चे तेल का आयात बढ़ने के आसार नहीं है, हालांकि जुलाई या अगस्त में कुछ सीमित अवसरवादी खेपें आ सकती हैं। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है। देश अपनी तेल जरूरतों का 88 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात से पूरा करता है और 2022 के बाद से रियायती रूसी तेल की खरीद में काफी वृद्धि की है।
उन्होंने कहा कि भारत की तेल आयात स्थिति फिलहाल संतोषजनक दिखती है और रिफाइनरियां समय रहते आपूर्ति सुरक्षित कर रही हैं। कुल मिलाकर, भारत का कच्चा तेल आयात खंड विविध, संतुलित और पर्याप्त रूप से सुरक्षित स्थिति में है।
