Startup India : केंद्र सरकार ने देश में इनोवेशन और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के ताजा बयान के अनुसार, अब तक 2 लाख से अधिक फर्मों को ‘स्टार्टअप इंडिया’ योजना के तहत आधिकारिक रूप से स्टार्टअप का दर्जा दिया जा चुका है। इन मान्यताप्राप्त स्टार्टअप को आयकर छूट समेत कई तरह की सरकारी सुविधाएं और प्रोत्साहन दिए जाते हैं। मंत्रालय का कहना है कि इससे देश में रोजगार और निवेश दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
सरकार ने अब तक दो लाख से अधिक फर्मों को स्टार्टअप के रूप में मान्यता दी (तस्वीर-istock)
दो लाख से अधिक स्टार्टअप को मिली मान्यता
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा की रिपोर्ट में बताया गया कि मंत्रालय के मुताबिक उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने अब तक कुल 2,01,335 स्टार्टअप को मान्यता प्रदान की है। ये स्टार्टअप भारत के विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं और नवाचार, तकनीक, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, सेवा और विनिर्माण जैसे अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। मंत्रालय का दावा है कि इन स्टार्टअप ने अब तक 21 लाख से अधिक रोजगार पैदा किए हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में यह संख्या और भी बढ़ने की संभावना है।
पीएलआई योजना से बढ़ता निवेश
उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाएं सरकार की उन प्रमुख पहलों में से एक हैं, जिनका उद्देश्य भारत को विनिर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। बयान के अनुसार, पीएलआई योजनाओं के तहत 14 प्रमुख क्षेत्रों में जून 2025 तक 1.88 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वास्तविक निवेश प्राप्त किया जा चुका है। इन क्षेत्रों में मोबाइल निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, दूरसंचार उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल शामिल हैं। सरकार का मानना है कि पीएलआई स्कीम ने न केवल भारतीय कंपनियों बल्कि वैश्विक कंपनियों को भी भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
निर्यात में भी हुआ महत्वपूर्ण इजाफा
पीएलआई योजनाओं का लाभ केवल निवेश तक सीमित नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, इन योजनाओं के तहत 7.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात हुआ है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का सबसे बड़ा योगदान रहा है, जबकि फार्मा, दूरसंचार उपकरण और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र ने भी अहम भूमिका निभाई है। सरकार का कहना है कि आने वाले समय में भारत इन क्षेत्रों में विश्व बाजार में और मजबूत स्थान बना सकता है।
ओएनडीसी के जरिये तेजी से बढ़ता डिजिटल वाणिज्य
डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन वाणिज्य को बढ़ावा देने के लिए ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) की शुरुआत की गई थी। मंत्रालय के अनुसार, सरकारी ई-कॉमर्स मंच ओएनडीसी ने अक्टूबर 2025 तक 32.6 करोड़ से अधिक ऑर्डर पूरे किए हैं। यह मंच छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और होम-बेस्ड उद्यमियों को बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों के मुकाबले समान अवसर देता है। सरकार का कहना है कि इससे डिजिटल बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और उपभोक्ताओं को भी बेहतर विकल्प मिल रहे हैं।
कारोबार करने में आसानी: कई अनुपालन नियम खत्म
सरकार लगातार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ यानी कारोबार करने में आसानी को बढ़ावा देने पर काम कर रही है। मंत्रालय के मुताबिक, नवंबर 2025 तक 47,000 से अधिक अनुपालन नियमों को हटाया या सरल किया गया है। इन उपायों का उद्देश्य छोटे और मध्यम उद्योगों पर बोझ कम करना और व्यावसायिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए जन-विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक 2025 को 18 अगस्त 2025 को लोकसभा में पेश किया गया। यह विधेयक व्यावसायिक नियमों में सुधार लाने और दंडात्मक प्रावधानों को कम करने से संबंधित है।
सरकार द्वारा जारी यह आंकड़े बताते हैं कि भारत तेजी से स्टार्टअप और उत्पादन आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। स्टार्टअप इंडिया, पीएलआई योजनाएं, ओएनडीसी और अनुपालन सुधार जैसे कदमों ने व्यवसाय, रोजगार, डिजिटल वाणिज्य और निवेश में नई ऊर्जा भर दी है। सरकार का दावा है कि ये प्रयास देश को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं
