दुनिया में हथियारों के व्यापार और खरीद में पिछले 5 सालों में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट ने वैश्विक हथियार बाजार की एक नई और चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। साल 2021 से 2025 के बीच दुनिया भर में हथियारों की खरीद-फरोख्त के समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक (Importer) बन गया है, जबकि पाकिस्तान भी तेजी से शीर्ष पांच देशों की सूची में शामिल हो गया है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका की बादशाहत बरकरार है, लेकिन रूस जो कभी हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा खिलाड़ी था, उसकी हिस्सेदारी में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
भारत इन 3 देशों से खरीदता है हथियार
भारत लंबे समय तक अपनी सैन्य जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर रहा है, लेकिन पिछले पांच वर्षों में इस तस्वीर में बड़ा बदलाव आया है। रिपोर्ट बताती है कि 2011-15 के दौरान भारत के कुल हथियार आयात में रूस की हिस्सेदारी 70% थी, जो 2021-25 तक घटकर महज 40% रह गई है। भारत अब अपनी सैन्य जरूरतों के लिए फ्रांस, इजरायल और अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों की ओर रुख कर रहा है। इसके अलावा, 'मेक इन इंडिया' और स्वदेशी डिजाइन क्षमता बढ़ने के कारण भारत के कुल हथियार आयात में 4.0% की कमी आई है। चीन और पाकिस्तान के साथ जारी सीमा तनाव, विशेषकर मई 2025 के संक्षिप्त संघर्ष ने भारत को अपनी सैन्य तैयारियों को आधुनिक बनाने के लिए मजबूर किया है।
पाकिस्तान का चीन पर बढ़ता भरोसा
भारत के विपरीत, पाकिस्तान की सैन्य शक्ति अब पूरी तरह से चीन पर टिकी हुई है। पाकिस्तान के कुल हथियार आयात का लगभग 80% हिस्सा अकेले चीन से आता है। रिपोर्ट के अनुसार, 2016-20 के मुकाबले 2021-25 के दौरान पाकिस्तान के हथियार आयात में 66% की भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे वह दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा आयातक बन गया है। यह आंकड़ा दक्षिण एशिया में बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा और चीन-पाकिस्तान के गहरे होते रक्षा संबंधों की ओर साफ इशारा करता है।
रूस की गिरावट और अमेरिका का दबदबा
वैश्विक निर्यात (Export) के मोर्चे पर अमेरिका 42% हिस्सेदारी के साथ दुनिया का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर बना हुआ है। वहीं, यूक्रेन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते रूस को तगड़ा झटका लगा है। रूस का निर्यात हिस्सा जो कभी 21% हुआ करता था, अब गिरकर मात्र 6.8% रह गया है। इसका बड़ा कारण अल्जीरिया, मिस्र और चीन जैसे देशों द्वारा रूसी हथियारों की खरीद में कमी करना है। इसी दौरान फ्रांस 9.8% हिस्सेदारी के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बनकर उभरा है।
यूरोप में बढ़ता बारूद और चीन की आत्मनिर्भरता
1960 के दशक के बाद यह पहली बार हुआ है कि यूरोप दुनिया में हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार क्षेत्र बन गया है। यूक्रेन युद्ध ने पूरे यूरोपीय महाद्वीप में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिसके कारण वहां हथियारों का आयात 33% तक पहुंच गया है। दूसरी तरफ, चीन ने इस मामले में सबको हैरान किया है। चीन अब दुनिया के शीर्ष 10 आयातक देशों की सूची से बाहर हो गया है। पिछले पांच वर्षों में चीन के हथियार आयात में 72% की गिरावट आई है, क्योंकि वह अब रूसी तकनीक की जगह अपनी स्वदेशी तकनीक, विशेषकर विमान इंजन और हेलीकॉप्टर विकसित करने में सफल रहा है।
