Indian Railway: भारत में माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी वर्तमान में 28 से 30 प्रतिशत के बीच है। यह वैश्विक मानकों के मुकाबले काफी कम है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे माल ढुलाई क्षेत्र में वृद्धि के व्यापक अवसर मौजूद हैं। एसोचैम और व्यवसाय सलाहकार फर्म असेला की हाल ही में प्रकाशित संयुक्त रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2030 तक 300 करोड़ टन माल ढुलाई क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए रेलवे को और मजबूत, टिकाऊ और कुशल प्रणाली बनाना जरूरी है।
भारतीय रेलवे की माल ढुलाई में हिस्सेदारी बढ़ाने की आवश्यकता (तस्वीर-istock)
समर्पित गलियारे और विद्युतीकरण से बढ़ रही कार्यकुशलता
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक रिपोर्ट में बताया गया है कि माल ढुलाई के लिए समर्पित गलियारे बनाने और विद्युतीकरण जैसी पहलों से रेलवे की कार्यकुशलता और स्थिरता में सुधार हुआ है। इन पहलों से न केवल माल ढुलाई तेज हो रही है बल्कि पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। विद्युतीकरण के कारण ईंधन की लागत कम हो रही है और प्रदूषण में भी कमी आई है। इससे रेलवे माल ढुलाई का अधिक आकर्षक विकल्प बन रहा है।
क्षमता विस्तार और निजी भागीदारी बढ़ाने की जरूरत
रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है कि रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए क्षमता विस्तार, माल ढुलाई गलियारों का विकास और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना आवश्यक है। इसके अलावा अंतिम छोर तक संपर्क यानी “फर्स्ट माइल और लास्ट माइल” कनेक्टिविटी को सुधारने पर भी जोर दिया गया है। इससे माल समय पर और कम लागत में गंतव्य तक पहुंचेगा, जिससे उद्योगों की लॉजिस्टिक लागत कम होगी।
लॉजिस्टिक लागत में कमी की चुनौती
भारत में लॉजिस्टिक लागत वर्तमान में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 7.97 प्रतिशत है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे कम करना आर्थिक वृद्धि के लिए जरूरी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रेलवे को परिवहन का एक अधिक लागत-कुशल और टिकाऊ माध्यम बनाने पर ध्यान देना चाहिए। यदि रेलवे की हिस्सेदारी बढ़े और माल ढुलाई की प्रक्रिया तेज और सस्ती हो, तो भारत की आर्थिक विकास दर पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
सम्मेलन में नीति निर्माता और उद्योग जगत ने साझा की राय
एसोचैम ने इस रिपोर्ट को जारी करने के लिए एक सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें वरिष्ठ नीति निर्माता, उद्योग जगत के नेता और क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हुए। उन्होंने भारतीय रेलवे की भूमिका पर चर्चा की और यह माना कि रेलवे की मजबूत माल ढुलाई क्षमता आर्थिक विकास को तेज करने और लॉजिस्टिक क्षेत्र में बदलाव लाने में मदद कर सकती है।
भारतीय रेलवे की नई दिशा
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (यातायात वाणिज्य) सुरेंद्र कुमार अहिरवार ने कहा कि भारतीय रेलवे तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रही है। रेलवे अब केवल धीमी प्रगति करने वाली संस्था नहीं रह गई है, बल्कि यह एक अधिक गतिशील और भविष्य के लिए तैयार प्रणाली की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों और नीतियों के माध्यम से रेलवे अपने परिचालन को और कुशल, टिकाऊ और लागत-कुशल बना रही है।
रिपोर्ट और विशेषज्ञों की राय से स्पष्ट होता है कि भारतीय रेलवे के लिए अब यह जरूरी है कि वह माल ढुलाई में हिस्सेदारी बढ़ाए, लागत कम करे और नई तकनीकों को अपनाए। समर्पित गलियारों, विद्युतीकरण और निजी भागीदारी से रेलवे अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो न केवल रेलवे बल्कि पूरे देश की आर्थिक वृद्धि और लॉजिस्टिक क्षमता को भी नई दिशा मिलेगी।
