Income Tax Return Filing 2025: अगर आप वेतनभोगी हैं और हर साल ITR-1 फॉर्म के ज़रिए पुरानी टैक्स व्यवस्था में रिटर्न दाखिल करते हैं, तो इस बार आपको ज्यादा सतर्क रहने की जरुरत है। अब केवल फॉर्म 16 काफी नहीं होगा। टैक्स विभाग को अब अधिक पुख्ता दस्तावेजी सबूत चाहिए।
आईटीआर फाइल करने से पहले जान लें ये जरूरी बातें
ITR फाइलिंग में क्या बदला है इस साल?
पहले तक, अगर आपकी आय सिर्फ वेतन से होती थी, तो फॉर्म 16 के आधार पर आप आसानी से ITR-1 भर सकते थे। आपने जो भी टैक्स बचाने वाले निवेश किए होते, जैसे LIC, ELSS, हेल्थ इंश्योरेंस वो सब कंपनी के जरिये फॉर्म 16 में शामिल कर लिए जाते थे और किसी अलग दस्तावेज की जरूरत नहीं होती थी। अब ऐसा नहीं है।
विस्तृत जानकारी देना अनिवार्य
पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत धारा 80C (PPF, LIC, ELSS), 80D (हेल्थ इंश्योरेंस), और 24(b) (होम लोन ब्याज) जैसी कटौतियों के लिए अब फाइलिंग के समय ही विस्तृत जानकारी देना अनिवार्य होगा। अब यह डेटा केवल स्क्रूटनी या असेसमेंट के समय नहीं मांगा जाएगा, बल्कि फाइलिंग के दौरान ही देना पड़ेगा। अगर आप कोई दावा करते हैं लेकिन उसे साबित करने के लिए दस्तावेज नहीं देते, तो उसे खारिज किया जा सकता है और आपको अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है। टैक्सपेयर्स को खुद अपने दस्तावेजों को संभालना और प्रस्तुत करना होगा, ताकि फाइनेंशियल सिस्टम के ज़रिए वेरिफिकेशन किया जा सके।
कुछ कटौतियों के लिए विशेष दस्तावेज जरूरी
धारा 80DD / 80U (दिव्यांग आश्रित) के लिए
- Form 10-IA की डिटेल
- आश्रित का PAN या Aadhaar
- UDID नंबर (अगर हो)
धारा 80E (शिक्षा ऋण ब्याज) के लिए
- लेंडर की डिटेल
- ब्याज भुगतान का प्रमाण
- ऋण देने वाली संस्था की जानकारी
लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स रिपोर्टिंग में बदलाव
अब ITR-1 फॉर्म के जरिए ₹1.25 लाख तक के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) को रिपोर्ट किया जा सकता है, अगर वो इक्विटी म्यूचुअल फंड्स या शेयरों से संबंधित हों। 23 जुलाई 2025 के बाद की पूंजीगत कमाई पर टैक्स नहीं लगेगा। ITR दाखिल करने की डेडलाइन भी बढ़ाकर 15 सितंबर 2025 कर दी गई है, अगर ऑडिट की जरुरत नहीं है।
क्या करना चाहिए?
अगर आप इस साल भी पुरानी टैक्स व्यवस्था चुन रहे हैं, तो सभी रसीदें और दस्तावेज पहले से इकट्ठा करें।इंश्योरेंस, PPF, ELSS, लोन आदि से जुड़े कागज तैयार रखें। किराए के प्रमाण और अन्य बचत प्रमाणपत्र संभालकर रखें। इससे न सिर्फ फाइलिंग आसान होगी, बल्कि बाद में टैक्स विभाग की किसी जांच से भी बचा जा सकेगा।
