IMF Growth Forecast 2023: दुनिया 30 साल की सबसे कम ग्रोथ रेट की ओर बढ़ रही है। इस बात की आशंका अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में जताई है। IMF ने अगले दो साल के लिए भारत की ग्रोथ रेट अनुमान में भी कमी कर दी है। हालांकि इसके बावजूद वह साल 2023 मेंदुनिया में सबसे तेजी से ग्रोथ करने वाला देश होगा। वहीं अगर पूरी दुनिया की बात की जाय तो अगले 5 साल ग्रोथ रेट 3 फीसदी के स्तर पर रह सकती है। जो कि 1990 के बाद सबसे कम ग्रोथ रेट रहने का अनुमान है।
दुनिया की सुस्त रहेगी रफ्तार
अपनी रिपोर्ट में IMF ने साल 2023 के लिए दुनिया की ग्रोथ रेट का अनुमान 0.1 फीसदी घटाया। उसेके अनुसार 2023 में दुनिया की ग्रोथ रेट 2.8 फीसदी रह सकती है। वहीं दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की बात की जाय अमेरिका, चीन और यूरो जोन के देश के बेहतर ग्रोथ रेट हासिल कर सकते हैं। हालांकि IMF ने जर्मनी और ब्रिटेन को मंदी में जाने की भी आशंका जताई है।
भारत और चीन का कैसा रहेगा हाल
जहां तक दुनिया की सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं की बात है तो भारत और चीन 5 फीसदी से ज्यादा की ग्रोथ हासिल करेंगे। भारत साल 2023 में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली इकोनॉमी बना रहेगा। इस साल भारत की ग्रोथ रेट 5.9 फीसदी रहेगी। हालांकि आईएमएफ ने भारत की ग्रोथ रेट का अनुमान घटा दिया है। पहले उसने 2023 के लिए 6.1 फीसदी ग्रोथ रेट का अनुमान जताया था। वहीं साल 2024 के लिए 6.3 फीसदी की ग्रोथ रेट का अनुमान जताया है। जो कि जनवरी के अनुमान 6.8 फीसदी से 0.5 फीसदी कम है। जहां तक चीन की बात है तो आईएमएफ ने चीन को लेकर जनवरी के अनुमान को बरकरार रखा है। उसने चीन के लिए 5.2 फीसदी ग्रोथ रेट का अनुमान जताया है।
| देश | GDP रेट का अनुमान फीसदी में (2023) |
| दुनिया | 2.8 |
| भारत | 5.9 |
| चीन | 5.2 |
| अमेरिका | 1.6 |
| जापान | 1.3 |
| जर्मनी | -0.1 |
| ब्रिटेन | -0.3 |
| रुस | 0.7 |
महामारी के झटके से उबर रही है दुनिया
आईएमएफ ने अपनी वर्ल्ड इकोनॉमी आउटलुक (World Economic Outlook)रिपोर्ट में कहा है कि दुनिया कोविड महामारी के झटके से उबर रही है। लेकिन रुस के यूक्रेन पर आक्रमण का भी असर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी इकोनॉमी साल 2023 में पहले के अनुमान के मुकाबले 0.2 फीसदी तेजी से बढ़ेगी और उसकी जीडीपी ग्रोथ रेट 1.6 फीसदी रह सकती है। हालांकि अगले साल यह गिरकर 1.1 फीसदी पर आ सकती है। और आने वाले समय में ब्याज दरों में भी कटौती होने की संभावना है।
