IEX Share Price Rally: करीब छह महीने तक सुस्त पड़े Indian Energy Exchange Ltd (IEX) के शेयर में मंगलवार को अचानक जबरदस्त हलचल दिखी। एक ही कारोबारी सत्र में शेयर करीब 13% तक उछल गया। लेकिन इस तेजी के पीछे न तो कोई तिमाही नतीजा था, न ही बिजनेस ग्रोथ का बड़ा ऐलान। असली वजह रेगुलेटरी फ्रंट से आई वह खबर रही, जिसने निवेशकों की उम्मीदों को फिर से जगा दिया।
एनर्जी एक्सचेंज में तेजी (फोटो क्रेडिट, ओपन एआई)
क्यों आई तूफानी तेजी?
शेयर में तेजी की शुरुआत तब हुई, जब इलेक्ट्रिसिटी अपीलेट ट्रिब्यूनल (APTEL) में सुनवाई के दौरान सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (CERC) की ओर से पेश वकील ने कहा कि वह जुलाई 2025 के मार्केट कपलिंग ऑर्डर को वापस लेने पर ट्रिब्यूनल से निर्देश लेने को तैयार हैं। यह वही आदेश था, जिसने बीते साल IEX के शेयर को एक ही दिन में करीब 30% गिरा दिया था। APTEL ने साफ संकेत दिए कि अगर CERC इस आदेश को वापस लेने की संभावनाओं पर औपचारिक रूप से जानकारी देता है, तो मामला जल्द निपटाया जा सकता है। अब इस केस की अगली सुनवाई 9 जनवरी को तय है।
“थियेट्रिक्स” पर कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
सुनवाई के दौरान APTEL की टिप्पणी ने भी बाजार का ध्यान खींचा। ट्रिब्यूनल ने कहा कि उसे बताया गया है कि मार्केट कपलिंग का फैसला कुछ अधिकारियों को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया। कोर्ट ने नियम बनाने की प्रक्रिया को “थियेट्रिक्स” करार देते हुए कहा कि रेगुलेशन शांति और पारदर्शिता से भी किया जा सकता था।
APTEL ने यह भी कहा कि वह CERC से निष्पक्षता की उम्मीद करता है और किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर जांच से पीछे नहीं हटेगा।
IEX की दलील: ऑर्डर गलत
IEX लगातार इस ऑर्डर को रद्द करने की मांग कर रहा है। कंपनी का कहना है कि मार्केट कपलिंग न सिर्फ प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि इससे एक्सचेंज की 17 साल में बनी रेगुलेटरी व्यवस्था भी बिगड़ जाएगी। IEX के मुताबिक, कपलिंग लागू होने से उसकी लगभग 85% की स्पॉट मार्केट हिस्सेदारी कमजोर होगी और “बेस्ट प्राइस डिस्कवरी प्लेटफॉर्म” का उसका बिजनेस मॉडल प्रभावित होगा।
IEX को क्या खतरा?
जुलाई 2025 में CERC ने पावर मार्केट रेगुलेशन 2021 के तहत डे-अहेड मार्केट (DAM) में कपलिंग को मंजूरी दी थी। इसके तहत अलग-अलग पावर एक्सचेंज बारी-बारी से मार्केट कपलिंग ऑपरेटर (MCO) की भूमिका निभाएंगे। इस प्रक्रिया में सभी एक्सचेंजों के बाय और सेल ऑर्डर को एक साथ जोड़कर एक समान मार्केट क्लियरिंग प्राइस तय होगी। इससे IEX की वह बढ़त खत्म हो सकती है, जो अब तक उसे प्राइस डिस्कवरी में मिलती रही है। यही वजह है कि बाजार इस फैसले को IEX के लिए निगेटिव मानता है।
फंडामेंटल मजबूत, लेकिन कीमतों पर दबाव
बिजनेस के स्तर पर IEX के आंकड़े कमजोर नहीं हैं। Q3 FY26 में कंपनी ने 34.08 बिलियन यूनिट बिजली का ट्रेड किया, जो सालाना आधार पर करीब 12% की बढ़त दिखाता है। हाइड्रो और विंड पावर की बढ़ी उपलब्धता से एक्सचेंज पर लिक्विडिटी बढ़ी, जिससे पावर प्राइस में नरमी आई। डे-अहेड मार्केट में औसत कीमत ₹3.22 प्रति यूनिट रही, जबकि रियल-टाइम मार्केट की कीमत ₹3.26 प्रति यूनिट पर आ गई। इसके बावजूद शेयर की चाल पर रेगुलेटरी अनिश्चितता भारी पड़ती दिख रही है।
एनालिस्ट की दो टूक राय: हर तेजी में बेचो
तेजी के इस दिन भी मार्केट एक्सपर्ट्स का रुख बदला नहीं है। ET Now की रिपोर्ट के मुताबिक एनालिस्ट प्रदीप हलदर का IEX पर नजरिया निगेटिव है। उनका कहना है कि यह शेयर “हर उछाल पर बेचने” वाला है। उनके अनुसार, जब तक मार्केट कपलिंग और ट्रांजैक्शन फीस जैसे मुद्दों पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक IEX पर दबाव बना रहेगा। टेक्निकल चार्ट्स भी कमजोर हैं और यह तेजी 'डेड कैट बाउंस' साबित हो सकती है। एक दिन की 13% तेजी ने भले ही सुर्खियां बना दी हों, लेकिन IEX की कहानी अब भी कोर्ट और रेगुलेटर के फैसलों पर टिकी है। जब तक मार्केट कपलिंग पर अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक यह शेयर खबरों के भरोसे ऊपर-नीचे होता रह सकता है।
