Semiconductor: भारतीय सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में आने वाली है बहार, IESA अध्यक्ष ने किया बड़ा दावा

Semiconductor: सेमीकंडक्टर उद्योग के निकाय 'इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन' (IESA) के अध्यक्ष अशोक चांडक ने कहा कि भारत को सेमीकंडक्टर के वैश्विक केंद्रों से सीखने की जरूरत है क्योंकि यह एक बहुत ही जटिल टैक्नोलॉजी है। उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि दुनिया भर में आपूर्ति सीरीज से संबंधित बाजार 2030 तक बढ़कर 420 अरब डॉलर हो जाएगा।

Semiconductor: इलेक्ट्रॉनिक चिप बनाने में शामिल रसायनों एवं गैसों सहित आपूर्ति श्रृंखला के आसपास एक परिवेश को बढ़ावा देकर भारतीय सेमीकंडक्टर उद्योग का आकार वर्ष 2030 तक 40 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। उद्योग निकाय के शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को यह संभावना जताई। सेमीकंडक्टर उद्योग के निकाय 'इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन' (IESA) के अध्यक्ष अशोक चांडक ने यहां आयोजित एक सम्मेलन में कहा कि भारत को सेमीकंडक्टर के वैश्विक केंद्रों से सीखने की जरूरत है क्योंकि यह एक बहुत ही जटिल प्रौद्योगिकी है।

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भारतीय सेमीकंडक्टर का भविष्य उज्ज्वल (तस्वीर-Canva)

चांडक ने कहा कि किसी भी चिप विनिर्माण से कम-से-कम 10 से अधिक देश जुड़े होते हैं। यह बहुत जटिल काम है। अगर हमें भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण को सफल बनाना है तो हमें आपूर्ति सीरीज का ध्यान रखना होगा जिसमें गैस, रसायन, सामग्री शामिल हैं। आपूर्ति सीरीज का ज़्यादातर हिस्सा उन संयंत्रों से जुड़ा होना चाहिए जो सेमीकंडक्टर का निर्माण करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2022 में आईईएसए ने सेमीकंडक्टर परिवेश से किए जाने वाले आधारभूत कार्यों पर एक रिपोर्ट जारी की थी और अब इसने एक रिपोर्ट में भारत के लिए विनिर्माण से जुड़े सभी मामलों का विवरण दिया है।

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