पर्सनल गारंटर के नियमों में कड़ाई, IBBI ने सख्त किए दिवाला नियम

आईबीबीआई ने व्यक्तिगत गारंटरों की दिवाला प्रक्रिया में बड़े सुधारों का प्रस्ताव दिया है। इसमें संबंधित पक्षों को वोटिंग से बाहर रखना, अनिवार्य संपत्ति मूल्यांकन और धोखाधड़ी वाले लेन-देन की पहचान शामिल है।

भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) ने कंपनियों के व्यक्तिगत गारंटर (Personal Guarantors) से जुड़ी दिवाला समाधान प्रक्रिया के नियमों में बड़े और कड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है। यह कदम कॉर्पोरेट जगत के दिवाला मामलों में पारदर्शिता लाने और लेनदारों (Creditors) के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से उठाया गया है। हाल ही में एस्सेल समूह (Essel Group) के चेयरमैन सुभाष चंद्रा से जुड़े बहुचर्चित दिवाला मामले के बाद IBBI ने 12 सितंबर को एक चर्चा पत्र जारी कर इन बदलावों पर सुझाव मांगे हैं।

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आईबीबीआई का व्यक्तिगत गारंटर की दिवाला प्रक्रिया के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव (तस्वीर-AI)

सुभाष चंद्रा मामले से उपजा बड़ा विवाद

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक IBBI द्वारा नियमों में बदलाव की मुख्य वजह एस्सेल समूह के प्रमुख सुभाष चंद्रा से जुड़ा मामला माना जा रहा है। इस मामले में एक प्रस्तावित पुनर्भुगतान योजना (Repayment Plan) के तहत लेनदारों को चंद्रा की निजी संपत्ति से केवल 6.5 करोड़ रुपये मिलने का प्रावधान था, जबकि उनके खिलाफ कुल 22,006 करोड़ रुपये के बड़े दावे दर्ज थे। इसका सीधा अर्थ था कि दावों में करीब 99.9% की भारी कटौती (Haircut) की जा रही थी।

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