भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) ने कंपनियों के व्यक्तिगत गारंटर (Personal Guarantors) से जुड़ी दिवाला समाधान प्रक्रिया के नियमों में बड़े और कड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है। यह कदम कॉर्पोरेट जगत के दिवाला मामलों में पारदर्शिता लाने और लेनदारों (Creditors) के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से उठाया गया है। हाल ही में एस्सेल समूह (Essel Group) के चेयरमैन सुभाष चंद्रा से जुड़े बहुचर्चित दिवाला मामले के बाद IBBI ने 12 सितंबर को एक चर्चा पत्र जारी कर इन बदलावों पर सुझाव मांगे हैं।
आईबीबीआई का व्यक्तिगत गारंटर की दिवाला प्रक्रिया के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव (तस्वीर-AI)
सुभाष चंद्रा मामले से उपजा बड़ा विवाद
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक IBBI द्वारा नियमों में बदलाव की मुख्य वजह एस्सेल समूह के प्रमुख सुभाष चंद्रा से जुड़ा मामला माना जा रहा है। इस मामले में एक प्रस्तावित पुनर्भुगतान योजना (Repayment Plan) के तहत लेनदारों को चंद्रा की निजी संपत्ति से केवल 6.5 करोड़ रुपये मिलने का प्रावधान था, जबकि उनके खिलाफ कुल 22,006 करोड़ रुपये के बड़े दावे दर्ज थे। इसका सीधा अर्थ था कि दावों में करीब 99.9% की भारी कटौती (Haircut) की जा रही थी।
हालांकि, सुभाष चंद्रा ने इस पर अपनी सफाई देते हुए कहा कि 22,006 करोड़ रुपये की राशि उनका व्यक्तिगत लोन नहीं है, बल्कि यह उनकी समूह की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज की कॉर्पोरेट गारंटी है। उनके अनुसार, उनकी व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े दावे करीब 3,990 करोड़ रुपये के हैं, जबकि शेष राशि मूल कर्जदार कंपनियों के खिलाफ दावों से संबंधित है। फिलहाल, असहमत लेनदारों की याचिका पर यह मामला राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के समक्ष विचाराधीन है, जबकि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की पांच सदस्यीय विशेष पीठ ने 1 सितंबर को ही चंद्रा की संपत्तियों की बिक्री और हस्तांतरण पर रोक लगा दी थी।
संबंधित पक्षों की वोटिंग पर लगेगी रोक
IBBI के नए प्रस्तावों का सबसे मुख्य बिंदु गारंटर से जुड़े 'संबंधित पक्षों' (Related Parties) को पुनर्भुगतान योजना पर मतदान करने से पूरी तरह बाहर रखना है। वर्तमान में व्यक्तिगत गारंटर का कोई सहयोगी मतदान प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकता, लेकिन नए नियमों के तहत उनका वोटिंग शेयर सीधा 'शून्य' माना जाएगा। इसके अलावा, समाधान पेशेवर (Resolution Professional - RP) के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह लेनदारों की सूची तैयार करते समय स्पष्ट रूप से उल्लेख करे कि कौन सा लेनदार गारंटर का संबंधित पक्ष है और कौन सा नहीं। इससे निष्पक्ष लेनदारों के अधिकारों का हनन नहीं होगा।
संपत्तियों का निष्पक्ष मूल्यांकन और पारदर्शी रिकॉर्ड
प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, समाधान प्रक्रिया के दौरान व्यक्तिगत गारंटर की संपत्तियों का मूल्यांकन अनिवार्य किया जाएगा। संपत्ति का उचित मूल्य (Fair Value), उससे वास्तव में प्राप्त होने वाली अनुमानित राशि और मूल्यांकन रिपोर्ट को पुनर्भुगतान योजना के साथ लेनदारों के सामने पेश करना होगा। इसके साथ ही, लेनदारों की बैठकों में हुई चर्चा और निर्णयों के कारणों को कार्यवृत्तमें दर्ज करना अनिवार्य होगा। यदि लेनदार किसी ऐसी पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी देते हैं जिसमें मिलने वाली राशि कुल स्वीकृत दावों या संपत्तियों के अनुमानित मूल्य से काफी कम है, तो उन्हें इसका स्पष्ट कारण रिकॉर्ड में दर्ज करना होगा कि उन्होंने गारंटर को दिवालिया घोषित करने के बजाय इस योजना को स्वीकार करना क्यों बेहतर समझा।
धोखाधड़ी और अनुचित सौदों की पहचान
नए नियमों में यह प्रावधान भी शामिल है कि समाधान पेशेवर को मतदान से पहले यह जांच करनी होगी कि गारंटर ने दिवाला प्रक्रिया शुरू होने से पहले कोई संदिग्ध या अनुचित लेन-देन तो नहीं किया है। इसमें किसी खास लेनदार को अनुचित प्राथमिकता देना, संपत्ति को बहुत कम कीमत पर बेचना, धोखाधड़ी वाले सौदे करना या अत्यधिक कड़े ब्याज और शर्तों पर ऋण लेना शामिल है। RP को इन सभी लेन-देन की पूरी जानकारी लेनदारों को देनी होगी ताकि पुनर्भुगतान योजना पर सही फैसला लिया जा सके। IBBI ने इन सभी प्रस्तावित बदलावों पर सभी हितधारकों (Stakeholders) से 3 अक्टूबर तक अपनी राय और सुझाव भेजने को कहा है, जिसके बाद नए नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
