टैक्स बचाने के लिए माता-पिता या पत्नी किसे गिफ्ट करें शेयर?

शेयर बाजार में निवेश करने वाले अक्सर टैक्स बचाने के लिए अपने शेयर परिजनों को गिफ्ट करते हैं। लेकिन पत्नी को शेयर गिफ्ट करने और माता-पिता को शेयर गिफ्ट करने पर इनकम टैक्स के नियम बिल्कुल बदल जाते हैं। जानिए सही रणनीति।

भारतीय शेयर बाजार में मिलने वाले रिटर्न पर लगने वाले कैपिटल गैन टैक्स (Capital Gain Tax) से बचने या उसे कम करने के लिए शेयर ट्रांसफर या गिफ्ट करना एक प्रचलित रणनीति है। आयकर कानून, 1961 के तहत रिश्तेदार (Relative) को शेयर या म्यूचुअल फंड यूनिट्स गिफ्ट करना पूरी तरह से टैक्स-फ्री होता है। हालांकि, कई निवेशक इस भ्रम में रहते हैं कि पत्नी या माता-पिता में से किसी को भी शेयर गिफ्ट (Share Gift) करके वे उस पर होने वाली कमाई या मुनाफा पर टैक्स बचा सकते हैं। असल में, इनकम टैक्स के 'क्लब्ड इनकम' (Clubbing of Income) नियमों के कारण पत्नी और माता-पिता को शेयर गिफ्ट करने के परिणाम एक-दूसरे से काफी अलग होते हैं, जिसे सही तरीके से समझना बेहद जरूरी है।

share Gift rule

किसे गिफ्ट करें शेयर?

गिफ्ट करने पर क्या लगता है टैक्स?

अगर कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को शेयर गिफ्ट करता है, तो शुरुआती ट्रांसफर के समय भले ही कोई टैक्स न लगे, लेकिन भविष्य में होने वाले मुनाफे पर टैक्स बचाने का मकसद पूरा नहीं होता। आयकर अधिनियम की धारा 64(1)(iv) के तहत यदि आप अपनी पत्नी को कोई वित्तीय संपत्ति (जैसे शेयर) बिना पर्याप्त प्रतिफल (Adequate Consideration) के गिफ्ट करते हैं, तो उस संपत्ति से होने वाली किसी भी आय या कैपिटल गैन को आपकी ही आय में जोड़ दिया जाएगा। इसे 'क्लब्डिंग ऑफ इनकम' कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि अगर आपकी पत्नी उन गिफ्ट किए गए शेयरों को बेचकर मुनाफा कमाती है या उन पर डिविडेंड प्राप्त करती है, तो उस टैक्स की देनदारी आपकी ही बनी रहेगी और आपको अपनी आय के अनुसार टैक्स देना होगा।

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