हम रोज़ाना कई करेंसी नोटों का लेन-देन करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि आपकी जेब में रखा वह 10, 100 या 500 का नोट असल में भारत के किस शहर में छपा है? भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास नोट छापने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रिंटिंग प्रेस हैं। दिलचस्प बात यह है कि हर नोट खुद बताता है कि उसकी प्रिंटिंग कहां हुई है, बस हमें उस गुप्त कोड या निशान को पहचानने की ज़रूरत होती है। भारत में नोटों की छपाई का काम मुख्य रूप से चार शहरों नासिका, देवास, मैसूर और सालबोनी में होता है।
कैसे चेक करें कहां हुई प्रिंटिंग?
किसी भी भारतीय नोट की छपाई वाली जगह को जानने के लिए आपको नोट के नंबर पैनल (Number Panel) के पास देखना होता है। नोट पर छपे नंबरों के बीच में एक 'इनसेट लेटर' (Inset Letter) होता है। यह लेटर एक वर्णमाला (Alphabet) के रूप में होता है, जैसे A, B, C, या R। यही वह अक्षर है जो प्रिंटिंग प्रेस के पते का खुलासा करता है। अगर नोट पर कोई भी अक्षर नहीं लिखा है, तो इसका मतलब है कि वह नोट एक विशिष्ट प्रेस में छपा है जहां इनसेट लेटर का उपयोग नहीं किया जाता।इनसेट लेटर्स का गणित
भारतीय मुद्रा पर लिखे इनसेट लेटर्स का सीधा संबंध उस शहर से होता है जहां की प्रेस में उसे छापा गया है। उदाहरण के तौर पर, अगर आपके नोट पर 'A' लिखा है, तो इसका मतलब है कि वह नासिक (महाराष्ट्र) की प्रेस में तैयार हुआ है। इसी तरह, 'B' अक्षर देवास (मध्य प्रदेश) की प्रेस को दर्शाता है। अगर नोट पर 'C' लिखा है, तो वह मैसूर (कर्नाटक) में छपा है, और 'D' अक्षर सालबोनी (पश्चिम बंगाल) की प्रेस की पहचान है। यह सिस्टम RBI को नोटों की ट्रैकिंग और मैनेजमेंट में मदद करता है।
सिक्कों की पहचान भी है आसान
नोटों की तरह सिक्कों की ढलाई (Minting) कहां हुई है, यह जानना और भी आसान है। सिक्कों पर साल (Year) के ठीक नीचे एक छोटा सा निशान होता है। अगर साल के नीचे एक 'सितारा' (Star) बना है, तो वह हैदराबाद का सिक्का है। अगर वहाँ एक 'बिंदु' (Dot) है, तो वह नोएडा में बना है। 'डायमंड' (Diamond) का निशान मुंबई की पहचान है, और यदि वहां कोई भी निशान नहीं है, तो समझ जाइये कि वह सिक्का कोलकाता की टकसाल में ढाला गया है।
नोट कहां छपा है, यह जानने के अलावा RBI सुरक्षा फीचर्स पर भी विशेष ध्यान देता है। अलग-अलग प्रेस में छपने के बावजूद सभी नोटों की क्वालिटी और सुरक्षा मानक एक जैसे होते हैं। इनमें वॉटरमार्क, सिक्योरिटी थ्रेड और कलर चेंजिंग इंक जैसे फीचर्स शामिल होते हैं। इनसेट लेटर का इस्तेमाल केवल पहचान के लिए किया जाता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किसी विशेष सीरीज के नोटों में अगर कोई गड़बड़ी आती है, तो वह किस यूनिट से हुई है।
