रसोई गैस से कितना महंगा है घरों तक PNG पहुंचना, इतना है एक कनेक्शन का खर्च?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और LPG सप्लाई में आ रही रुकावटों के बीच, भारत सरकार अब तेजी से घरों को PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) से जोड़ने पर जोर दे रही है। लेकिन क्या पाइप वाली गैस वाकई आपके बजट में फिट बैठती है और एक नया PNG कनेक्शन लगवाने में आपकी जेब पर कितना बोझ पड़ेगा?

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध (अमेरिका-इजराइल और ईरान संघर्ष) के कारण भारत में एलपीजी (LPG) की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। भारत अपनी जरूरत का 60% एलपीजी आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा समुद्री रास्तों से आता है, इसलिए सरकार अब 'एनर्जी सिक्योरिटी' को लेकर अलर्ट मोड पर है। इसी संकट के बीच केंद्र सरकार ने राज्यों से पाइपलाइन बिछाने की प्रक्रिया को तेज करने और 24 घंटे के भीतर मंजूरी देने का अनुरोध किया है। सरकार का पूरा जोर अब उपभोक्ताओं को सिलेंडर वाली एलपीजी से हटाकर पाइप वाली पीएनजी (PNG) पर शिफ्ट करने का है। लेकिन सवाल यह है कि क्या पीएनजी वाकई एलपीजी से बेहतर है और एक आम आदमी की जेब पर इसका कितना बोझ पड़ेगा?

LPG Vs PNG

दोनों में क्या है अंतर?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि एलपीजी और पीएनजी में अंतर क्या है। एलपीजी (LPG) सिलेंडर में भरी जाने वाली गैस है जिसमें प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होता है, जबकि पीएनजी (PNG) सीधे पाइपलाइन से आपके किचन तक पहुंचने वाली 'नैचुरल गैस' है जिसमें मुख्य रूप से मीथेन होती है। सुरक्षा के लिहाज से पीएनजी को कहीं ज्यादा बेहतर माना जाता है। एलपीजी हवा से भारी होती है, इसलिए लीक होने पर यह जमीन पर जमा हो जाती है जिससे आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। इसके विपरीत, पीएनजी हवा से हल्की होती है और लीक होने पर तुरंत हवा में उड़ जाती है। इसके अलावा, पीएनजी में 'सिलेंडर खत्म होने' या 'बुकिंग' जैसा कोई झंझट नहीं होता; इसकी सप्लाई पानी के नल की तरह 24 घंटे चालू रहती है।

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