गुजरात का सूरत शहर आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है। इसे दुनिया की 'सिल्क सिटी' और 'डायमंड सिटी' के नाम से जाना जाता है। लेकिन सूरत रातों-रात दुनिया का सबसे बड़ा डायमंड और टेक्सटाइल हब नहीं बना, बल्कि इसके पीछे सदियों पुराना व्यापारिक इतिहास, भौगोलिक स्थिति और यहां के लोगों की गजब की एंटरप्रेन्योरशिप (व्यापारिक सूझबूझ) है। तापी नदी के तट पर बसे इस शहर का रणनीतिक स्थान और ऐतिहासिक बंदरगाह (Port) हमेशा से विदेशी व्यापारियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है, जिसने इसके औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रखी।
सूरत दुनिया का डायमंड और टेक्सटाइल हब कैसे बना?
टेक्सटाइल हब कैसे बना सूरत?
टेक्सटाइल यानी कपड़ा उद्योग की बात करें, तो सूरत का इतिहास सदियों पुराना है। मुग़ल काल से ही यह शहर ज़री के काम और सिल्क के कपड़ों के लिए मशहूर था। समय के साथ यहां आधुनिक पावरलूम और मिलें स्थापित हुईं। सूरत ने खुद को बदलते वक्त के साथ ढाला और सिंथेटिक फाइबर व पॉलिस्टर के निर्माण में महारत हासिल कर ली। आज भारत में बनने वाले कुल आर्ट सिल्क (Art Silk) का एक बहुत बड़ा हिस्सा अकेले सूरत में तैयार होता है। यहां की कपड़ा मंडियां और रोजाना लाखों मीटर कपड़ा तैयार करने वाली मिलें देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अपनी धाक जमा चुकी हैं।
हीरों का हब कैसे बना?
वहीं दूसरी तरफ, डायमंड (हीरा) उद्योग में सूरत की बादशाहत बेमिसाल है। दुनिया के हर 10 में से 9 हीरों की कटिंग और पॉलिशिंग अकेले सूरत शहर में होती है। इस सफर की शुरुआत 1960 के दशक में कुटीर उद्योग के रूप में हुई थी, जब स्थानीय कारीगरों ने कच्चे हीरों को तराशने का काम शुरू किया। यहां के व्यापारियों ने रफ हीरों को इम्पोर्ट करने और पॉलिश किए गए हीरों को एक्सपोर्ट करने का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया। कम लागत में बेहतरीन फिनिशिंग और कारीगरों की अद्भुत कला के दम पर सूरत ने बेल्जियम और इजरायल जैसे बड़े देशों को पछाड़कर वैश्विक हीरा व्यापार पर अपना कब्जा जमा लिया।
सूरत की इस ऐतिहासिक सफलता का सबसे बड़ा श्रेय यहां के स्थानीय व्यापारियों के रिस्क लेने की क्षमता और कुशल लेबर फोर्स को जाता है। व्यापार के अनुकूल सरकारी नीतियों, हाल ही में बने 'सूरत डायमंड बोर्स' (Surat Diamond Bourse) जैसे विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतरीन कनेक्टिविटी ने इस शहर को ग्लोबल बिजनेस मैप पर सबसे ऊपर पहुंचा दिया है। आज यह शहर न सिर्फ लाखों लोगों को रोजगार दे रहा है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने वाला एक प्रमुख इंजन बन चुका है।
