ट्रेन टिकट के लिए कैसे और कब तय होता है कोच और बर्थ नंबर?

Train Ticket Rules: ट्रेन टिकट बुक करते ही मिलने वाला कोच और बर्थ नंबर अंतिम नहीं होता। ट्रेन छूटने से करीब 4 घंटे पहले Chart Preparation और फाइनल ऑप्टिमाइजेशन के दौरान ही आपकी कंफर्म सीट पूरी तरह से तय की जाती है।

भारतीय रेलवे (Indian Railway) से सफर करने वाले हर यात्री के मन में कभी न कभी यह सवाल जरूर आता है कि आखिर टिकट बुकिंग (Ticket Booking) के समय या उसके बाद हमें कौन सी सीट मिलेगी, यह कैसे तय होता है? अक्सर लोग कन्फर्म टिकट मिलने के बाद उस पर लिखे कोच और बर्थ नंबर को ही अंतिम मान लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि रेलवे के नियमों के मुताबिक चार्ट बनने से पहले तक आपकी सीट पूरी तरह से फाइनल नहीं होती है? जी हां, भारतीय रेलवे के पास चार्ट प्रिपरेशन (Chart Preparation) के दौरान सीटों को दोबारा व्यवस्थित करने का पूरा अधिकार होता है। इस प्रक्रिया को 'फाइनल ऑप्टिमाइजेशन' कहा जाता है। आइए जानते हैं रेलवे का यह पूरा सिस्टम किस तरह काम करता है और आपकी सीट आखिरी समय पर क्यों और कैसे बदल सकती है।

Indian Railway

कैसे तय होती है बर्थ और कोच?

जब आप आईआरसीटीसी (IRCTC) की वेबसाइट या रेलवे काउंटर से टिकट बुक करते हैं, तो आपको तुरंत एक कोच (जैसे S5) और बर्थ नंबर (जैसे 36) अलॉट कर दिया जाता है। लेकिन रेलवे इस आवंटन को शुरुआती व्यवस्था मानता है। असली खेल तब शुरू होता है जब ट्रेन छूटने से करीब 4 घंटे पहले उसका पहला चार्ट तैयार किया जाता है। इस चार्ट प्रिपरेशन के दौरान रेलवे का ऑटोमेटेड कंप्यूटर सिस्टम सभी बुक हो चुकी सीटों का 'Final Optimization' करता है। इसका मुख्य उद्देश्य ट्रेन के सभी डिब्बों में वजन का संतुलन बनाए रखना और विभिन्न कोटा (जैसे सीनियर सिटीजन, महिला या विकलांग कोटा) के तहत खाली रह गई सीटों को वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को सही तरीके से बांटना होता है। इस प्रक्रिया में कई बार पहले से अलॉट की गई सीट में मामूली बदलाव हो जाता है और आपका कोच या बर्थ नंबर बदल सकता है।

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