Health Insurance Claim 2 hour Rule: क्या आपको भी लगता है कि हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम करने के लिए अस्पताल में 24 घंटे भर्ती रहने की शर्त पूरी करना जरूरी है। अगर हां, तो आपके लिए हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम करने को लेकर यह जानकारी और भी जरूरी हो जाती है। बहुत कम लोगों को जानकारी होगी कि 24 घंटे से कम समय के लिए अस्पताल में भर्ती होने पर भी हेल्थ इंश्योरेंस का दावा किया जा सकता है । जी हां, जहां पहले ज्यादातर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में दावा दायर करने के लिए कम से कम 24 घंटे अस्पताल में भर्ती होना आवश्यक होता था। वहीं, अब कई बीमा कंपनियां कुछ चुनिंदा योजनाओं के साथ इस शर्त को पूरा न करने पर भी दावा स्वीकार कर रही हैं।
अब 24 घंटे भर्ती जरूरी नहीं, केवल 2 घंटे में भी मिल सकता है हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम! (Photo: iStock)
24 नहीं 2 घंटे की शर्त करें बस पूरी
कई बीमा कंपनियां चुनिंदा योजनाओं के तहत 2 घंटे या उससे अधिक समय के लिए अस्पताल में भर्ती होने पर भी दावा स्वीकार कर रही हैं, इनमें आईसीआईसीआई लोम्बार्ड एलिवेट योजना, केयर अल्टीमेट केयर योजना, निवा बूपा रीएश्योर 2.0 योजना, बजाज एलियांज माई हेल्थ केयर योजना और केयर सुप्रीम योजना शामिल हैं।
डे केयर ट्रीटमेंट का भी ऑप्शन
इसके अलावा, डे केयर प्रक्रियाएं भी शुरू हो चुकी हैं, जिनमें कम से कम 24 घंटे तक अस्पताल में रहने की शर्त पूरा करना जरूरी नहीं होता। यानी अगर आप डे केयर ट्रीटमेंट करवा रहे हैं तो 24 घंटे से कम समय अस्पताल में भर्ती होने पर भी स्वास्थ्य बीमा दावे स्वीकार किए जाते हैं। हालांकि, यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि हेल्थ इंश्योरेंस का दावा सफलतापूर्वक करने के लिए नियमों और शर्तों को पूरा करना जरूरी है।
हेल्थ इंश्योरेंस में डे केयर ट्रीटमेंट क्या है
डे-केयर ट्रीटमेंट वे इलाज या सर्जरी होते हैं जो अब नई तकनीक की वजह से कुछ ही घंटों में पूरे हो जाते हैं, इसलिए मरीज को 24 घंटे तक अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत नहीं पड़ती।
मेडिक्लेम बीमा में कई ऐसे इलाज शामिल होते हैं जिन्हें डे-केयर ट्रीटमेंट कहा जाता है। इसमें मोतियाबिंद की सर्जरी, टॉन्सिल हटाने का ऑपरेशन (तोंसिल्लेक्टोमी), कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी, डायलिसिस, हार्ट की जांच जैसे एंजियोग्राफी, साइनस से तरल निकालना, एंडोस्कोपी से पॉलीप हटाना, किडनी स्टोन तोड़ने की प्रक्रिया (लिथोट्रिप्सी), स्किन ग्राफ्टिंग और घुटने से जुड़ी कुछ प्रक्रियाएं शामिल हैं।
अच्छी बात यह है कि भारत में लगभग सभी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां ऐसे डे-केयर ट्रीटमेंट को कवर करती हैं, लेकिन हर पॉलिसी में कवर होने वाले इलाजों की सूची अलग-अलग हो सकती है, इसलिए पॉलिसी लेते समय उसकी शर्तें जरूर चेक कर लेनी चाहिए।
