लॉटरी खेलने वालों के लिए बुरी खबर है, जीएसटी काउंसिल ने बड़ा फैसला लेते हुए टैक्स का बोझ और बढ़ा दिया है। अब लॉटरी टिकट खरीदने पर पहले की तरह 28% नहीं, बल्कि पूरे 40% टैक्स देना होगा। यानी, किस्मत आजमाने का शौक जेब पर पहले से ज्यादा भारी पड़ने वाला है। जीएसटी काउंसिल की हालिया बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है। अब लॉटरी, बेटिंग, कैसिनो और ऑनलाइन गेमिंग पर लगने वाला टैक्स बढ़ा दिया गया है। पहले इन पर 28% जीएसटी लगता था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 40% कर दिया गया है। यह बदलाव 22 सितंबर 2025 से लागू होगा।
क्यों बढ़ाया गया टैक्स?
सरकार का कहना है कि लॉटरी और बेटिंग जैसी गतिविधियां "सिन गुड्स" की श्रेणी में आती हैं। इन पर ज्यादा टैक्स लगाकर लोगों को इन्हें अपनाने से हतोत्साहित करना ही मकसद है। साथ ही टैक्स ढांचे को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में भी यह कदम उठाया गया है।
राज्यों का विरोध
इस फैसले का विरोध केरल समेत कई राज्यों ने किया है। केरल सरकार का तर्क है कि लॉटरी राज्य की कमाई का एक बड़ा स्रोत है। ज्यादा टैक्स से टिकटों की बिक्री घट सकती है और इससे राज्य के राजस्व पर सीधा असर पड़ेगा।
आम जनता पर असर
इस फैसले का सीधा असर टिकट खरीदने वालों की जेब पर पड़ेगा। उदाहरण के लिए, अगर पहले 100 रुपये का लॉटरी टिकट खरीदा जाता था, तो उस पर 28 रुपये टैक्स लगता था। अब उसी टिकट पर 40 रुपये टैक्स देना होगा। यानी लॉटरी टिकट और महंगे हो जाएंगे।
राज्यों की आमदनी पर खतरा
केरल देश का सबसे बड़ा लॉटरी बाजार है, जहां से लगभग 97% लॉटरी राजस्व आता है। अनुमान है कि इस साल यहां की लॉटरी बिक्री 14,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती थी। लेकिन टैक्स बढ़ने से बिक्री घट सकती है, जिससे सरकारी कल्याण योजनाओं जैसे करुण्या स्वास्थ्य योजना पर भी असर पड़ सकता है।
सरकार ने टैक्स स्ट्रक्चर को सरल बनाने और "सिन गुड्स" को महंगा करने का कदम उठाया है। हालांकि, इस फैसले से आम आदमी को लॉटरी टिकट महंगे मिलने लगेंगे और राज्यों की आमदनी पर भी दबाव बढ़ेगा।
