भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता काफी अहम होगा। जीएसटी 2.0, एच-1बी वीजा, भारत-यूएस ट्रेड डील और एफआईआई डेटा बाजार की चाल को प्रभावित करेंगे। वस्तु एवं सेव कर (GST) का नया फ्रेमवर्क 22 सितंबर से लागू हो रहा है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से एच- 1बी वीजा की फीस को बढ़ाकर एक लाख डॉलर कर दिया गया है। एच-बी वीजा पर बड़ी संख्या में भारतीय अमेरिका में काम करते हैं। इससे वहां की टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के भी बड़े पैमाने पर प्रभावित होने की संभावना है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया है। यह फीस केवल वन टाइम होगी और नए एच-1बी वीजा पर लागू होगी।
शेयर बाजार
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर अगले हफ्ते आने वाले किसी भी अपडेट का असर बाजार पर देखने को मिल सकता है। व्यापार वार्ता के लिए अमेरिकी प्रतिनिधि मंडल भारत आया हुआ है। वहीं, सरकार की ओर से भी स्पष्ट किया जा चुका है कि दोनों देशों के बीच बातचीत एक सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
बाजार के लिए बीता हफ्ता अच्छा रहा था
बीता हफ्ता भारतीय शेयर बाजार ने सकारात्मक रिटर्न दिया। इस दौरान निफ्टी बढ़कर 25,327.05 और सेंसेक्स 721.53 अंक की मजबूती के साथ 82,626.23 पर था। 15-19 सितंबर तक के कारोबारी सत्र में निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 4.83 प्रतिशत की बढ़त के साथ शीर्ष पर था। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी ने 4.43 प्रतिशत, निफ्टी एनर्जी ने 2.31 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई ने 2.19 प्रतिशत और निफ्टी सर्विसेज ने 0.95 प्रतिशत का रिटर्न दिया।
बीते हफ्ते विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 1,327.38 करोड़ रुपए की इक्विटी में बिकवाली की, जो कि पिछले कई कारोबारी हफ्तों में एफआईआई की बिकवाली का सबसे निचला स्तर है। घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने इक्विटी में निवेश जारी रखा और 11,177.37 करोड़ रुपए का निवेश किया।
आईटी सेक्टर की कंपनियों पर होगा असर
रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष-शोध अजित मिश्रा ने कहा, ‘‘इस सप्ताह, बाजार शुक्रवार देर रात घोषित एच-1बी वीजा पर 100,000 डॉलर का वार्षिक शुल्क लगाने के अमेरिकी फैसले पर प्रतिक्रिया देंगे। जबकि निर्यात पर निर्भर क्षेत्र पहले से ही शुल्क से संबंधित दबाव का सामना कर रहे हैं। व्यापार वार्ता चल रही है। ऐसे में इस संवेदनशील समय में यह कदम आईटी सेवा निर्यातकों पर और दबाव डाल सकता है।’’ उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर निवेशक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में कटौती के बाद अमेरिकी बाजार के प्रदर्शन पर बारीकी से नजर रखेंगे। भारत के 285 अरब डॉलर के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र के लिए अपने सबसे बड़े आउटसोर्सिंग बाजार में मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि अमेरिका ने एच-1बी वीजा आवेदन शुल्क को 100,000 डॉलर (लगभग 88 लाख रुपये) तक बढ़ाने का फैसला किया है। आईटी कंपनियों के शीर्ष निकाय नासकॉम ने चेतावनी दी है कि इससे ‘ऑनशोर’ परियोजना के लिए कारोबार की निरंतरता बाधित होगी। ऑनशोर परियोजना में संबंधित कंपनी के मुख्य परिचालन वाले क्षेत्र में रहकर सेवाएं देनी होती हैं।
इन कंपनियों पर सबसे बुरा असर
स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के वरिष्ठ तकनीकी विश्लेषक प्रवेश गौड़ ने कहा, ‘‘यह कदम (एच-1बी वीजा आवेदन शुल्क को 100,000 डॉलर तक बढ़ाने का अमेरिकी फैसला) अमेरिकी ग्राहकों की लागत में भारी वृद्धि कर सकता है और भारतीय प्रौद्योगिकी प्रतिभा की मांग कम कर सकता है, जिससे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इन्फोसिस और विप्रो जैसे बड़े आईटी निर्यातकों की आय पर सीधा असर पड़ेगा।’’ उन्होंने कहा कि घरेलू मोर्चे पर कारोबारी रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजर रखेंगे, जो भारतीय शेयर बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण है।
