तेल क्षेत्र (विनियमन और विकास) संशोधन अधिनियम के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे नए नियमों के मसौदे में यह प्रावधान शामिल किया गया है कि किसी भी राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में भारत में उत्पादित सभी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस पर सरकार का पहला अधिकार होगा। मसौदे में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई आपात स्थिति उत्पन्न होती है। जैसे युद्ध, सैन्य तनाव या बड़ी प्राकृतिक आपदा तो सरकार पट्टे पर दिए गए तेल और गैस क्षेत्रों से निकाले गए संसाधनों पर अपने अधिकार का प्रयोग कर सकेगी।
आपातकाल में सरकार को मिलेगा तेल-गैस पर अधिकार
वाजिब बाजार मूल्य पर किया जाएगा भुगतान
तेल और गैस उत्पादकों को सरकार द्वारा उस समय के "उचित बाजार मूल्य" पर भुगतान किया जाएगा। यह व्यवस्था सरकार को आपात स्थिति में सार्वजनिक हित और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायता प्रदान करेगी।
नए कानून का उद्देश्य: घरेलू उत्पादन व निवेश में बढ़ोतरी
1948 के पुराने कानून की जगह ले रहे इस संशोधित अधिनियम का मुख्य उद्देश्य घरेलू ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाना, निजी निवेश को आकर्षित करना और भारत के ऊर्जा रूपांतरण लक्ष्यों को समर्थन देना है।
राष्ट्रीय आपात स्थिति की परिभाषा अस्पष्ट
हालांकि मसौदे में "राष्ट्रीय आपात स्थिति" को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार युद्ध, सीमावर्ती तनाव या प्राकृतिक आपदा जैसी स्थितियाँ इसके अंतर्गत आ सकती हैं।
