देश में पेट्रोल और डीजल का उत्पादन सामान्य होने और मांग की तुलना में बेहतर सप्लाई पहुंचने के बाद सरकार ने तेल कंपनियों को बड़ी राहत दी है। सरकार के नए आदेश के तहत निर्यात (Export) किए जाने वाले पेट्रोल, डीजल और हवाई ईंधन (ATF) पर विंडफाल टैक्स (Windfall Tax) में कटौती की गई है। इस आदेश के तहत डीजल के निर्यात पर टैक्स 25.5 रुपये से घटाकर 24 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि पेट्रोल पर इसे 3.5 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है। वहीं हवाई ईंधन पर भी विंडफाल टैक्स 22 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 19.5 रुपये कर दिया गया है।
सबसे पहले कब लागू हुआ था
सरकार हर पखवाड़े (15 दिनों में) अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों की समीक्षा करके इस टैक्स को रिवाइज करती है। केंद्र सरकार ने सबसे पहले जुलाई 2022 में निर्यात किए जाने वाले ईंधन पर यह टैक्स लागू किया था। इसका मुख्य मकसद तेल रिफाइनरियों और कंपनियों द्वारा ग्लोबल मार्केट में महंगा तेल बेचकर कमाए जाने वाले अचानक बड़े मुनाफे पर लगाम कसना था। दरअसल, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूती हैं, तो भारतीय निजी कंपनियां घरेलू बाजार के बजाय ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए अपना तेल विदेशों में एक्सपोर्ट करने लगती हैं।
क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल
अगर आपके मन में यह सवाल है कि क्या इस कटौती से देश में पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा, तो इसका सीधा जवाब है नहीं। विंडफाल टैक्स घटाने का असर आम जनता की जेब या पेट्रोल पंप के रेट पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा। यह टैक्स सिर्फ देश के बाहर भेजे जाने वाले ईंधन पर लगता है, इसलिए इसका फायदा केवल तेल कंपनियों को ही मिलेगा। सरकार ने साल 2024 में इस टैक्स को हटा दिया था, लेकिन वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के कारण जब मार्च 2026 में अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें फिर से बढ़ीं, तो घरेलू आपूर्ति बनाए रखने के लिए इसे दोबारा लागू कर दिया गया।
3 अगस्त को हुई थी बढ़ोतरी
दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने इसी महीने की शुरुआत (3 अगस्त) में इस टैक्स को काफी बढ़ाया था, जहां डीजल पर एकमुश्त 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। हालांकि, अब सप्लाई की स्थिति बेहतर होते ही कंपनियों को इसमें राहत दे दी गई है। यह पूरी व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि निजी रिफाइनरियाँ ज्यादा मुनाफे के लालच में देश के भीतर ईंधन की कमी न होने दें।
