प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत देशभर में 10.6 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को रसोई गैस कनेक्शन का लाभ मिल चुका है। सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में बताया कि योजना के लाभार्थियों के बीच LPG सिलेंडर का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। वहीं, घरेलू गैस की कीमतें नियंत्रित रखने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपये का मुआवजा भी दिया गया है।
उज्ज्वला योजना के तहत LPG पर मिलती है भारी सब्सिडी
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में उज्ज्वला योजना (Ujjwala Yojana) के लाभार्थियों ने औसतन 4.71 एलपीजी सिलेंडर रिफिल कराए। वित्त वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा 3.68 सिलेंडर रहा था। सरकार के मुताबिक, घरेलू एलपीजी की बेहतर उपलब्धता और किफायती कीमतों के कारण इसकी खपत में लगातार बढ़ोतरी हुई है।
सरकार का कहना है कि उज्ज्वला योजना के कारण गरीब परिवारों तक स्वच्छ ईंधन की पहुंच बढ़ी है। एलपीजी की बढ़ती खपत इस बात का संकेत है कि योजना का लाभ अब अधिक परिवार नियमित रूप से उठा रहे हैं।
महंगी गैस के बावजूद नहीं बढ़ाई कीमत
भारत अपनी कुल LPG जरूरत का करीब 60 फीसदी आयात करता है और इसकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क सऊदी सीपी पर आधारित होती हैं। जून 2026 में यह कीमत बढ़कर 796 डॉलर प्रति टनपहुंच गई थी। इसके चलते 14.2 किलोग्राम घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बाजार आधारित कीमत करीब 1,695 रुपये हो गई थी। इसके बावजूद सरकार ने उपभोक्ताओं के लिए घरेलू एलपीजी सिलेंडर की खुदरा कीमत 942 रुपये प्रति सिलेंडर पर बरकरार रखी।
उज्ज्वला लाभार्थियों को मिल रही अतिरिक्त राहत
सरकार ने बताया कि 10.5 करोड़ से अधिक उज्ज्वला लाभार्थियों को 300 रुपये प्रति सिलेंडर की लक्षित सब्सिडी मिल रही है। इसके बाद दिल्ली में इन उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलोग्राम सिलेंडर की प्रभावी कीमत 642 रुपये रह जाती है। हालांकि, जून 2026 में सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में तेजी को देखते हुए उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाले रिफिल की संख्या 9 से घटाकर 4 प्रति वर्ष कर दी थी।
तेल कंपनियों पर बढ़ा बोझ
सरकार के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक घरेलू एलपीजी की बिक्री पर सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों की अंडर-रिकवरी 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। अंडर-रिकवरी का मतलब अंतरराष्ट्रीय लागत और उपभोक्ताओं से वसूली गई कीमत के बीच का अंतर है। इस नुकसान की आंशिक भरपाई के लिए केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपये का मुआवजा मंजूर किया है।
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