भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर हर कोई अपनी बचत के अनुसार अलग-अलग निवेश माध्यमों में निवेश करता है। निवेश पर जोखिम लेने वाले निवेशक, शेयर व म्यूचुअल फंड को चुनते हैं। वह ऐसा बेहतर रिटर्न पाने के लिए करते हैं। वहीं, अपने निवेश पर बिल्कुल जोखिम नहीं लेने वाले निवेशक Post Office की स्मॉल सेविंग स्कीम जैसे PPF, RD, सकन्या समृद्धि आदि स्कीम में निवेश करते हैं। बहुत सारे निवेशक बैंक एफडी का भी चुनाव करते हैं। अब अगर बात लंबी अवधि के निवेश की आए तो सुकन्या, इक्विटी (शेयर, म्यूचुअल फंड), रियल एस्टेट या FD में किसका चुनाव करना चाहिए? वह भी तब दुनिया भर में आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक उथल-पुथल का दौर जारी है। आइए जानते हैं कि अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं तो इन चारों में कहां आपको बंपर रिटर्न के लिए निवेश करना चाहिए।
इन्वेस्टमेंट टिप्स (Istock)
सोना
सोना ने पिछले दो साल में अपने निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया है। सोने का भाव 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच चुका है। अगर सोने का औसत रिटर्न पिछले 10 सालों का देखें तो 11-12% के बीच रहा है। यानी अगर आप 10 साल के लिए निवेश करना चाहते हैं और निवेश पर बहुत कम जोखिम लेने के मूड में हैं तो सोने का चुनाव कर सकते हैं। सोना आपको बेहतर रिटर्न आगे भी दे सकता है।
इक्विटी
अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं और निवेश पर जोखिम ले सकते हैं तो शेयर और म्यूचुअल फंड स्कीम का चुनाव कर सकते हैं। अगर आप अपना जोखिम कम करना चाहते हैं तो सिप करें। आप सिप के जरिये अपने जोखिम को कम करते हुए आसानी से 12% का रिटर्न प्रॉप्त कर सकते हैं। आप लॉर्ज कैप या मिड कैप फंड का चुनाव कर यह रिटर्न आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड में शेयर के मुकाबले जोखिम भी काफी कम होगा।
एफडी
अगर आप अपने निवेश पर बिल्कुल जोखिम लेना नहीं चाहते हैं तो एफडी या स्मॉल सेविंग स्कीम का चुनाव कर सकते हैं। एफडी के जरिये आप फिक्स इनकम प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, इसमें आपको रिटर्न काफी कम मिलेगा। रिटायरमेंट के बाद के लिए फिक्स इनकम प्रोडक्ट बेस्ट होता है।
रियल एस्टेट
देश के प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों में पिछले 4 सालों में जबरदस्त उछाल आया है। किराये की आय में भी वृद्धि हुई है। हालांकि, अब आने वाले कुछ सालों में बड़ी वृद्धि की संभावना कम है। इसलिए रियल एस्टेट में निवेश पर तगड़ा रिटर्न मिलने की संभावना बहुत ही कम है। अगर आपके पास बहुत सारा पैसा तो ही रियल एस्टेट की ओर रुख करें।
गोल्ड Vs रियल एस्टेट Vs स्टॉक: फायदे और नुकसान
गोल्ड और रियल एस्टेट लिक्विडिटी और रिटर्न में अलग-अलग होते हैं। गोल्ड उच्च लिक्विडिटी प्रदान करता है, जिससे विशेष रूप से संकट के समय, तुरंत खरीदना या बेचना आसान हो जाता है। रियल एस्टेट, हालांकि कम लिक्विड, लॉन्ग-टर्म कैपिटल एप्रिसिएशन और संभावित किराए की आय प्रदान करता है। गोल्ड को शॉर्ट-टर्म स्थिरता के लिए पसंद किया जाता है, जबकि रियल एस्टेट लॉन्ग-टर्म वेल्थ-बिल्डिंग स्ट्रेटेजी के लिए उपयुक्त है।
गोल्ड को आमतौर पर इसकी स्थिरता और आर्थिक मंदी के दौरान वैल्यू को बनाए रखने की क्षमता के कारण स्टॉक की तुलना में सुरक्षित माना जाता है। स्टॉक बहुत अस्थिर हो सकते हैं और मार्केट की स्थितियों से प्रभावित हो सकते हैं। गोल्ड मुद्रास्फीति और फाइनेंशियल अनिश्चितता के खिलाफ हेज के रूप में कार्य करता है, जो कम जोखिम प्रदान करता है, लेकिन इक्विटी की तुलना में लॉन्ग-टर्म रिटर्न कम देता है।
कम जोखिम लेने वाले के लिए गोल्ड बेहतर
कम जोखिम लेने वाले निवेशकों के लिए गोल्ड बेहतर है। स्थिरता और सुरक्षा के लिए स्टॉक के बजाय गोल्ड बेहतर है। गोल्ड महंगाई और आर्थिक मंदी के खिलाफ हेज के रूप में कार्य करता है, जिससे यह अनिश्चित समय के दौरान एक सुरक्षित विकल्प बन जाता है। जब आर्थिक अस्थिरता के कारण स्टॉक मार्केट में गिरावट आती है, तो निवेशक अक्सर एक सुरक्षित स्वर्ग के रूप में सोना लेते हैं, जिससे उसकी कीमत बढ़ जाती है। इसके विपरीत, स्टॉक मार्केट की बुलिश अवधि के दौरान, गोल्ड की कीमतें स्थिर या कम होती हैं क्योंकि इन्वेस्टर सुरक्षा के मुकाबले इक्विटी से अधिक रिटर्न चाहते हैं।
किस तरह करें सही प्रोडक्ट का चुनाव
वित्तीय सलाहकार का कहना है कि निवेश से पहले जोखिम लेने की क्षमता, उम्र, आय और फाइनेंशियल गोल का आकलन करना चाहिए। इसके बाद गोल्ड, इक्विटी, म्यूचुअल फंड, रियल एस्टेट या एफडी का चुनाव करना चाहिए। वेल्थ क्रिएशन डायवर्सिफिकेशन में निहित है। चाहे आप 1 लाख रुपये या 10 लाख रुपये का निवेश कर रहे हों, आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए एक संतुलित पोर्टफोलियो बनाना महत्वपूर्ण है। इसलिए जोखिम लेने की क्षमता के अनुसार सही निवेश माध्यम का चुनाव करना चाहिए।
